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  • 2 days ago
जबलपुर महाकौशल कॉलेज में छात्र बन रहे आत्मनिर्भर, हैंडलूम पर कपड़ा बनाना सीख रहे बीए-बीकॉम और बीएससी के छात्र,रोजगार के साथ नया सीखने की पहल.

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Transcript
00:00बिमलेस आदिवासी रीवा के दूर दराज गाउं का रहने वाला है।
00:30बिमलेस का कहना है कि यह ऐसा काम है जिसे वा अपने घर पर भी कर सकता है।
01:00पताओ, आप यहां किस क्लास में पढ़े हैं।
01:02बिमलेस काम हैं।
01:04कब आए हैं।
01:06यह 25 सर्दिश में।
01:08कहां से एग हुआ हैं।
01:10यहां यह क्यों सीख रहे हैं।
01:12यह मतलब कि यह स्वर उजगार के लिए अच्छा उतर है।
01:16और जिनके पास नोकरियां नहीं हैं वो यह कर सकते हैं।
01:20यह हलकी मसीने हैं।
01:22पचास हजार की आती हैं।
01:24और आप घर बैठकर कमा सकते हैं।
01:26कितने दिन लगे हैं।
01:28सीखने में भी 15 दिन लगे हैं।
01:30सीख रहा हूँ अभी।
01:31यह चलाना तो आ गया पर
01:33गांठों की नौलेज यह जगते हैं।
01:35पिनों की नौलेज या फिर रस्तियों से तूटे की अर्धे की उसका भी कुछ खास मालूम नहीं।
01:41पित्री तो गट गरीवी जोनन का काम नहीं।
01:56दूसरे कई चात्र भी यह काम सीख रहे हैं।
01:59कॉलेज के प्रिंस्पल अलकेश चतुरवेदी का कहना है कि
02:03चात्रों की बढ़ते रुज़ान की वज़ए से वे और मशीने खरीदने की तयारी में हैं।
02:08परसल भी यह भी काम के चात्रों के लिए रोजगार का संकट होता है।
02:12इसलिए यदि उन्हें कोई ऐसा होनर मिल जाए जिससे वे खुद मेहनत करके
02:17रोजगार स्तापित कर सकें।
02:20उसी की कोशिश में हजकरगा का कारिक्रम सुरू किया गया।
02:23अलाकि पूरे देश में इस तरह का कारिक्रम दूसरी किसी कॉलेज में सुरू नहीं किया गया था।
02:29ये भात्तरगा एक्षा कॉलेज में और भूभी इस विए लिकोंपी पढ़ाई थे दिश्माने हैं।
02:49अपने भारतिय वेस गूसरा परिदान और वस्तर निर्मान की जो कला है उससे खाने का उत्यस है।
02:55और अभी आधर्णिय पजार मंत्री मोदी जी ने भी कहा है कि होकल पर लोकल तो इस संदर में बच्चों को स्वरोजगार के संदर में जो हरित जिसमें पावर यूज नहीं होता है और जो हैंडलूम के द्वारा और सूत से निर्मित वस्तर जो बहुत उपयोगी हैं हमारे
03:25करने के रिए अपने महाविद्यारे में ये लूम चालू किया है इसे विद्यारती प्रसिक्षित हो रहे हैं और इंट्रेस्ट भी है बच्चों में और अभी इसको प्रमोट करने के लिए हम लोगों ने इस टाइफंड की योजना भी निका लिए जो सीग्र लागू की जा
03:55अब बच्चों को प्रोफसाहित करें क्योंकि बहुत कम जैसे हमारा ये बच्चा है सिर्फ यही अभी उत्साह दिखा रहा है इसके पहले चार-पाँच बच्चों ने दिखाया हम इनको प्रोफसाहन राजशी के रूप में जो पचास रुपए हम लोगों ने नियदारित
04:25सिर्फ इसको एक कला के रूप में भी सीखेंगे और अपने स्वरोजगार को भी विक्सित करेंगे दूसरा उनका मस्तिस्क स्रजनात्मत्ता की और जाएगा क्योंकि इसमें डिजाइन भी क्रियेट होते हैं अभी जो आपको डिजाइन दिख रहा है ये दीरे दीरे मैं हम �
04:55मैं हमारे विद्यार्थियों को सिखाएगा क्योंकि विद्यार्थी ही ये दी विद्यार्थी को सिखाए तो वो ज्यादा प्रभावी होता है पड़े लिखे योवाही सबसे ज़्यादा बेरुजगारी का सिकार हैं उन्हें हुनर नहीं आता इसलिए काम नहीं मिल पाता हर
05:25Thank you very much.
05:55उन्हें घर बेटे ही रोजगार मिल जाएगा, इसमें नए प्रियोग किये जा सकते हैं, और बहतर कपला बनाया जा सकता है, और एक अच्छा खासा रोजगार पैदा किया जा सकता है.
06:09विश्वजीप सिंग्ध, इतीवी भारत जबल पूर.
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