00:00वकील है ममता बनर जी, लेकिन सुप्रीम कोट में क्यों नहीं रख पाएंगी दलील?
00:03ममता बनर जी ने खुद अदालत में पेश होकर दलील रखने की अनुमती मांगी है
00:08और उनके नाम पर एंट्री पास भी जारी हुआ है
00:10लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या कानून उन्हें बहस करने की इजाज़त देता है?
00:15ममता बनर जी, LLB डिग्री होल्डर है
00:17लेकिन वे प्राक्टिसिंग एड्वोकेट नहीं है
00:19सिर्फ कानून की पढ़ाई करने से अदालत में बहस करने का अधिकार नहीं मिल जाता
00:40के रूप में मौजूद रह सकती है, कारेवाही देख सकती है
00:43और अपने वकीलों को निर्देश दे सकती है
00:45लेकिन वकील की तरह जज के सामने कानूनी बहस नहीं कर सकती
00:48हालांकि उन्होंने अदालत से विशेश अनुमती मांगी है
00:50ये पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर निर्भर करेगा
00:53कि उन्हें सीमित तोर पर खुद पक्ष रखने की इजाज़त दी जाए या नहीं
00:57एक्सपर्ट्स के मुताबिक सार्वजनिक और समवैधानिक मामलों में
01:00ऐसी अनुमती बहुत ही असाधारन परिस्थितियों में दी जाती है
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