00:00क्या टल गया है अमेरिका और इरान के बीच युद्ध बादचीत की टेबल पर लोटे दोनों देश तुर्की में फिर शुरू करेंगे परमाडू वारता
00:22अमेरिका और इरान फिर से बादचीत की मेज पर हैं जी हाँ आपने सही सुना
00:30छे परवरी को इंस्तामबूल में दोनों देशों की प्रतीनी भी बैठेंगे ताकि लंबे समय से खड़े पर माणू विवाद को हल किया जा सके
00:38अमेरिका की तरफ है डॉनल्ड श्रूम के विसेश दूद स्टीव विटकॉफ और इरान की तरफ विदेश मंत्री सईद अब्बास अरागची
00:46इस बैठेक में साउधी अरब, मिस्र, कतर और UEE जैसे देश भी शामिल होंगी
00:51अकसत साफ है छेत्रिय तनाव घताना और पूपनीती को फिर से पठरी पर लाना
00:56लेकिन पेच वही है अमेरिका की तीन शर्ते और इरान की संप्रभुता की दलीले
01:02इरान ने अपनी तरफ से लचीरापन दिखाया है लेकिन अब गीन ट्रॉम्प के पाले में है
01:07मध्यपूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविध्यों के बढ़ने और राश्ट्रुपतू डॉनल्ड ट्रॉम्प की कड़ी चेतावनियों के कुछ ही दिनों बाद
01:19अब सब की निगाहें इस्तांबूल पर हैं क्यूंकि छे फरवरी को दो पुराने प्रतिद्वनवी संयुक्त राज्य अमेरिका और इरान फिर से बातचीत के लिए मेज पर बैठने वाले हैं जो ये तैय कर सकता है कि कूट नीती बनी रहेगी या संगर्ष और बढ़ेगा
01:49क्यों महदवपूर्ण है और अभी क्यों सबसे पहले संदर्ब इस बागचीत का उदेश्य इरान के परमानों कार्यक्रम पर वारता को पुनर जीवित करना है एक ऐसी फाइल जो पिछले दशक में कई बार रुकी पटरी से उत्री और लगभग नश्ट हो गई है अब बात
02:19प्रत्यक्ष में बदलने की अनुमती देता है और ये इस फूमिका को निभाने वाला तुर्की का पहला समय नहीं है इसने पहले भी इसी तरह की राजनायक प्रयासों की मेजबानी की है अब मेस पर कॉन है अमेरिकी पक्ष में प्रतिनिथी मंडल का नेत्रित्व मध्यप�
02:49इन्वारताओं के बारे में कितना गंभीर है।
03:19इन्वारताओं के बारे में कितना गंभीर है।
03:49इन्वारताओं के बारे में कितना गंभीर है।
04:19इसका मिसाइल कारिक्रम और इसके क्षेत्रिय गठ बंधन गैर नगोशियेबल है।
04:23और यहां मुख्य समस्या है।
04:25इरान संयुक्त राज्य अमेरिका पर भरोसा नहीं करता है।
04:28ये अविश्वास इतिहास में नहित है।
04:292018 में परमानू समझोते से अमेरिकी वापसी से जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या तक और अंतिम शन में बार बार विफल होती वारताओं तक।
04:37ये अविश्वास नहीं करता है।
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