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  • 1 week ago
रामायण में हनुमान जी को शिव का अंश और पवन पुत्र माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके जन्म से पहले ही रावण को इस दिव्य शक्ति का आभास हो गया था? कुछ पुराणों और लोककथाओं के अनुसार रावण ने हनुमान जी के जन्म को रोकने की कोशिश की थी।

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Transcript
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00:30अपसरा थी और श्राप के कारण
00:31वानरी रूप में जन्मी
00:32वो तप कर रही थी
00:34शिव के भक्ती कर रही थी
00:35और उसी समय हिमाले पर एक ऐसी
00:37घटना घटी जिसने अपने आने वाले
00:40यूगों का स्वरूप बदल लिया
00:41रावण शिव का परमभक्त था
00:43वो कैलाश पर जाकर घोर तपस्या कर रहा था
00:46कहा जाता है कि उसी समय हवा में
00:48घूमता हुआ एक दिव्य आभाकर्ण
00:50शिव की शक्ती का अंश
00:52अंजुना के पास पहुँझा
00:53ये वही छड़ था जब हनुमान को धर्ती पराने था
00:56लेकिन रावण को ये अभास हो गया था
00:58कि ये एक ऐसी दिव्य शक्ती जन्म लेने वाली है
01:01जो भविशे में उसके सामराज के विनाश में भूमिका निभाएगी
01:04रावण भैभीत हो गया
01:06उसे लगा कि अगर ये दिव्य शक्ती जन्म लेते ही
01:09समाप्त कर दी जाए तो उसका भविशे सुरक्षित रहेगा
01:11हर्मान जी पवन देव के अंच माने जाते हैं
01:14अंजना के गर्भ में जो दिव्य उर्जा प्रवेश कर रही थी
01:17वो पवन देव के माध्यम से ही आनी थी
01:19रावन ने अपने मायावी बल से रास्ते को रोकने की कोशिश की
01:24वासुदेव के मार्ग में बाधाएं खड़ी की
01:27ताकि देव्य शक्ती अंजना तक ना पहुचे
01:29लेकिन वायू को कौन रोक सकता है
01:32रावन की सारी शक्ती उस्ठाड व्यर्थ हो गई
01:34कहा जाता है कि हताश होकर
01:36रावन सीधा अंजना के आश्रम पहुचा
01:39उसने देखा कि अंजना ध्यान में लीन है
01:41रावन ने उन्हें डराने की कोशिश की
01:43कभी तेज हवाओं से आश्रम को हिला कर
01:46पर अंजना अडिग रही
01:47उनका तब रावन की मायवी शक्ती से
01:50कई गुना प्रबल था
01:51जब परिस्तिती गंभीर होती दिखी
01:53तो इंद्र वायू और ब्रह्मा तीनों
01:55ने हस्तक शिप किया
01:56उन्होंने देखा कि रावन एक ऐसे जन्म को
01:58रोखने की कोशिश कर रहा है
02:00जिसके कारण त्रेता युक का संतुलन बनेगा
02:02इंद्र ने रावन पर अपना वज्रुफे का
02:05लेकिन रावन वर्दानों के कारण बच गया
02:07ब्रह्मा ने घोशना की कि रावन ये जन्म रोका नहीं जा सकता
02:10आने वाला ये बालक न सेफ शिव अंश है
02:13बलकि वानर जाती का भविश भी है
02:14अंतिता वक्षन आया
02:16अंजुना के पास तेज प्रकाश उत्रा
02:18वायू देव शांत हुए और प्रत्वी पर जन हुआ
02:20मारोती अंजुने हमारे हनुमान जी का
02:24रावन दूर से ये सब देख रहा था
02:26और कहा जाता है कि उसने उसी चड़ समझ लिया था
02:28कि ये बालक मेरा अंतिताय करेगा
02:31और यही कारण था कि रावन ने कभी भी हनुमान को
02:34सीधे युद्ध में चुरौती नहीं दी
02:36क्योंकि वो जानता था कि ये वही दिवशक्ती है
02:39जिसे पैदा होते ही रोकने में वो असफल रहा था
02:42ये कहानी हमें बताती है कि जिसे जर्मे लेना होता है
02:45उसे पूरा ब्रह्मान मिलकर भी नहीं रोक सकता
02:48अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो कॉमेंट में सरूर बताएं
02:51We'll see you in the next video.
02:52Namaskar.
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