00:0020 March 1926 was in the city of Soda village in Soda village.
00:05The children of Kulish-ji's life had a lot of their lives in Kulish-ji's life.
00:10Their lives were destroyed by Kulish-ji.
00:16In the beginning of the year, Kulish-ji was one of the first two years in Kulish-ji's life.
00:21They died from Kulish-ji's life in Kulish-ji.
00:24Then, the youth of Kulish-ji's life started in Kulish-ji's life.
00:32Now, I am going to put a lot of Kulish-ji's life in Kulish-ji's life in Kulish-ji's life.
00:40Before that, they were born in Kulish-ji's life.
00:46They were born in Kulish-ji's life.
00:50They were born in Kulish-ji's life,
00:52which was born in Kulish-ji's life,
00:54which was born in Kulish-ji's life.
00:56They were born in Kulish-ji's life.
00:58Next.
01:00Next.
01:01Kulish-ji's life in Kulish-ji's life.
01:06I am happy to return to Kulish-ji,
01:08then they were born in Kulish-ji's life in Kulish-ji's life.
01:16So, now I am happy to have a few years.
01:18But at Kulish-ji's life,
01:20one of the most important things that we can do to do with the work of the people who are
01:25trying to do it.
01:26They could not do it but they could not do it.
01:29They could not do it.
01:31They could not do it.
01:33They could not do it.
01:36They could not do it.
01:39Today's story is a big deal.
01:45ुदार की पुँंजी भी एक बड़ Chengche कोख़ा कर देती है उनकी साद्गी और संगर शी आज पत्रिका के समूवत की सपलता की बुणियाद है
02:05ुदियावा
02:06ुदार की औरублиश जी के उस निडर रूप की बात करूँगी जिसने सत्ता की आखों से आखे डाल कर सच कहा
02:12ुनिस सो पिचुत्तर का वो दौर जब देश में एमेरजंसी लगी थी, अकबारों पर पहरे बिठा दिये गए थे, उस कठिन समय में कुलिश जी ने एक धाल बनकर खड़े हुए और पत्रकारिता के धर्म को निभाया, सरकार ने उन्हें डरानी के लिए पत्रकाव ओफिस क
02:42अकबार का सच नहीं दिखा सकता, तो उसका कोई मोल नहीं है। उनकी ये निडरता हमें सिखाती है कि चाहे परिस्तितियां कितनी भी कटा साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। एक महिला होने के नाते, उझे उनकी ये हिम्मत बहुत प्रभावित करती है। उन्होंने कभी
03:12नमस्ते, आज मैं कुलिश्ची के समाजिक सरोकार और उनकी जन भागी तारीक के बारे में बतना चाती हूँ। नमस्ते, कुलिश्ची की नेजर में अकबार के वल एक खबरों का पुलींदा नहीं, बलकि समाज के दुख दर्द को दवा था। उन्होंने जैकूर के शुर�
03:42का धर्म के वल सूचना देना नहीं, बलकि समाज में बतलाव लाना भी होता है। वे सत्ता के प्रति अच्छे काउडमों के प्रति तारिक भी करते थे, लेकिन गलत नीतियों पर वो प्रहार भी करते थे। कुलिश्ची ने पत्री वक्का को एक परिवार की तरह बनाया, उ
04:12बहुत प्रभावी है। हम दूसरों के काम आ सकें, वे समाज की कुरूतियों के खिलाव हमेशा एक सजल प्रहरी की तरह काम करा। उनके दरस्टी में अकबार वही हैं जो दबे कुछले लोगों की आवाज बन सके। आज उनके सववी जहनती पर हम उनके दिखाए गए इस
04:42पगर लोगतंत्र की बुनियाद ही जूट पर है तो देश का बला कैसे होगा। उनके नौकर शाही यानि अफसरों की कारे चाली पर भी हमेशा कड़े सवाल उठाए। वे दुख जताते थे कि आम आत्मी फाइलों की पीछे दफ्तरों के चक्कर लगाता रहता है। कुलि�
05:12इतनी सालों पहले थी। नैतिकता और उचे मूल्यों की प्रति उनका समर्पणी उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। हमें उनसे सीखना चाहिए कि जीवन में चाहे जो भी शेत्र हो शुचिता का दामन नहीं चोड़ना है। आज उनके जन्म शती पर हुनके उन महाल व
05:42उनकी नजर में अकबार का असली मालिक कोई उध्योगपती नहीं बलकि उचसे पढ़ने वाला आम पाटक था। वे खबरों के जरिये अपने संसनी फेलाने के सक्यत खिलाब थे वे सिर्फ प्रमानिक खबरे ही चाहते थे। पुलिस जी इतने बड़े पतपर होने के बाद
06:12से जुड़े रहना ही है। वे हमेशा आशावादी रहे जीवन के हर पल उताचड़ाओ को मुस्कराट के साथ पार किया। हम देख रहे हैं वे उनकी इसी साधिगी और मेहनत का फल है। उनकी जन्व शती पर हमारा सबसे बड़ा सम्मान ही होगा कि हम लोगों का विश्वा
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