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Lalita Jayanti 2026: ललिता जयंती का व्रत 1 फरवरी के दिन रखा जाएगा। माता ललिता को त्रिपुरा सुंदरी भी कहा जाता है क्योंकि त्रीपुरार्नव में कहा गया है कि यह देवी तीन नाड़ियों इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना में यानि मन, बुद्धि और चित्त में रहती हैं। मां ललिता के तीन रूप हैं- आठ वर्षीय बालिका, इस रूप को त्रिपुर सुंदरी कहा जाता है। सोलह वर्षीय किशोरी जिन्हें मां षोडषी कहा जाता है, वहीं मां के युवा स्वरूप को ललिता कहा जाता है। मां ललिता को मनोकामनाएं पूरी करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं की ललिता जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और इस दिन किस विधि से आपको माता की पूजा करनी चाहिए।


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~PR.115~HT.408~ED.118~

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00:00जैस्री कृष्णा जैस्यरां ललिता जैन्ती का सुब मुहूर्त कब दो हजार चब्विस में एक फरवरी दो हजार चब्विस को ललिता जैन्ती का पामन पर्व मनाया जाएगा
00:14मागमास की पूड़ मातिथी देवी की उपास्तना के लिए अत्यन्त ही सुब पर्व मनाया जाता है ललिता जैन्ती यहाँ दिन मा ललिता के संपूर स्वरूपों में एक जो मा का स्वरूप है जिसे ललिता प्रिपूर शुन्दरी के नाम से हम लोग जानते हैं
00:39ना सिर्फ सौंदर की अधिश्ठात्री देवी बताई गई है बलकि सक्ती ज्यान और मुक्ष की भी अधिश्ठात्री देवी के रूप में मा ललिता का पूजन किया जाता है
00:51इस दिन मा ललिता के जनमोशों के साथ पूजन और अर्चन किया जाता है
00:57बड़ी भक्ति भावशे लोग मा ललिता का आज के दिन पूजन करते हैं
01:02दो हजार चब्विस में ललिता जैन्ती एक फरवरी रभीवार को मनाई जाएगी
01:08और इस वर्स पूरिमा तिथी एक फरवरी की सुबह पांच बच करके बावन मिनट से प्रारंब हो रही है
01:16और दो फरवरी की सुबह तीन बच करके 38 मिनट पर समाप्त हो जाएगी
01:21तो इस तिथी का भी अत्यंत धार्मिक एवं तांत्रिक महत्त बताया गया है
01:27ऐसा माना जाता है कि आज के ही दिन मा ललिता का प्राकट्ट हुआ था
01:32जो की संसार में फैले अंदकार अधर्म और अहंकार को नास कर सके भक्तों के जीवन में प्रेम सौंदर और संतुलन की स्थापना हो
01:44ललिता का महत्तो मा ललिता को दस महा विद्याओं में एक माना जाता है
01:50त्रिपूर शुंदरी के नाम से भी ये विख्यात है और जिनका अर्थ है तीनों लोकों में सबसे शुंदर शक्तिशाली देवी उनका स्वरूप कोमल है
02:02परन्तु जब अधर्म बढ़ता है तो वे क्रोध रूपणी होकर के राक्षशों का संगार करती है
02:09वे ब्रह्मा, विष्पनु और महेश तीनों की उर्जा का संयुक्त रूप है
02:16कहा जाता है कि माललिता की अराधना करने से मनुस्य को मुक्ती, भोग और मुक्ष की प्राप्ती होती है
02:25ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन पूजा करने से नकारात्मक उर्जा जो है वे मिठती है, ग्रह क्लेस सांत होते हैं, जीवन में शौंदर्य होता है, शांती शुक का संचार भी बताया गया है
02:40और इसके साथ जो व्यक्ती भक्ति भाव के साथ मा ललिता का पूजन करते हैं, उनकी इक्षाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सफलता के द्वार भी खुलते हैं
02:51ललिता जैन्ती की पावन कथा, एक फरवरी दो हजार चब्विस को ये पावन पर्व मनाया जाएगा, पूर्ण माति थी के पावन सुबाव सर पर, ललिता देवी की कथा में कहा जाता है कि एक बार राजा दक्ष ने एक भव्य यग्जि का आयोजन किया, जिसमें उन्हों
03:21पहुंची और वहां उन्होंने भगवान शिव के स्थान को नहीं देखा, पिता के इस बेवहार से आहात हो करके देवी सती यग्जि कुंड में कून गई और आत्मदाह कर लिया, जब भगवान शिव को ये समाचार प्राप्त हुआ, तो वह अतनत क्रोध में उठे और उन
03:51को विनास से बचाने के लिए भगवान विष्णू ने अपने तरशूल को चलाया, जिससे सती के सरीर के 51 टुकडे हुए और वह टुकडे जहां जहां पर सती के गिरे, वहीं पर सक्तिपीट की स्थापना हो गई, कहा जाता है कि सती का एक अंग नईमिशारंड में, वर्तम
04:21ललिता सक्तिपीट के नाम से यह इस्थान कहलाया, इस पवित्र इस्थान पर माता का सुन्दर, ललिता देवी का मंदिर आज भी विराजमान है, इस्थापित है, यहां माता की पूजा करने से भक्तों के जीवन के कष्ट दूर होते हैं, और सौभाग्गी की प्राप्ती ह
04:51करने के लिए उनकी विसेश पूजा की जाती है पूजा करते समय मन में पवित्रतायों स्रद्धा का विश्वाश हमारे मन के अंदर अत्यदिक आवश्चक होना जरूरी है प्रते काल सुबह जल्दी उठ करके पिश्टनान करें लाल या गुलावी वस्त्रों को धारन करें क्
05:21और वहाँ पर देवी के चित्र को स्थापित करें सबसे पहले दीपक जलाएं फिर इसके बाद में धूब जलाएं वातावरन को पवित्र करें देवी को सिंदूर हल्दी चंदन पुष्प कुमकुम लाल चुणरी अरपित करें निम्न मंत्र ओम स्री ललिताय नमह इसमंत्
05:51का भी आप पाट कर सकते हैं यदि संभव है तो आज के दिन आपको स्री यंत्र की पूजा करना चाहिए क्योंकि यह देवी ललिता का ही प्रतिकात्मक चिन्ने भी बताया गया है फल और मिठाई पंचामर्स से देवी को भोग लगाना चाहिए अंत में आर्थी इत्यादि करक
06:21करें इस तरह से आपको ललिता जी के पावन जन्म की ये कथा भी स्रमन करनी चाहिए ललिता जैन्तीप के पावन पर्वेकी मा ललिता के प्राकट तुश्यों की आप सभी को बहुत-बहुत शुपकामना है मा सदव आप अपने बच्चों के ऊपर अपनी मंगल मैक्रपा को
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