00:00अर्जुन की आँखों में खाब बहुत बढ़े थे
00:24शाम धल चुकी थी
00:26दिन भर की मेहनत के बाद अर्जुन अपने ठेले को समेट कर घर लूटा
00:31जोमपड़ी छूटी थी
00:34मगर उसके अंदर मा की दुआओं की गर्मी बसी हुई थी
00:38मा आज एक बात बताओ
00:39हाँ बेटा सुना कबसे कोई अच्छी खबर नहीं सुनी दिल तरस गया
00:44मा मुझे शहर के शिरी राम कालिज आफ आर्किटेक्चर में एडमीशन मिल गया है में सिलेक्ट हो गया
00:50सच काश तेरे पता आज जिन्दा होते वो ये सुन कर कितना खुश होते
00:56बेटा जब ताव घर बनाना सिखे ना तो ऐसा घर बनाना जो लोगों की जिन्दगी बदल दे
01:01हाँ मा में ऐसा ही घर बनाओंगा तुम्हें कभी मायूस नहीं करूँगा
01:05खाब पूरे होने के करीब थे
01:08मगर एक सवाल था जो अर्जुन की नीन चरा रहा था
01:12कालिज की फीस
01:14एड्मीशन तो मिल गया मगर फीस कहां से आएगी
01:18मा ने सारी जिन्दगी मेरे लिए मेहनत की है
01:21मैं इसे और बोच नहीं दे सकता
01:23अगर फीस जमाना हुई तो मेरा खाब यहीं खत्म हो जाएगा
01:27ये वो लमहा था
01:29जब खाब और हकीकत आमने सामने खड़े थे
01:33गिले दिन आर्ती जमीनदार की हवेली पहुची
01:37ये हवेली गाउं के हर घर से कई गन्ना बड़ी और शाहाना थी
01:41मदर आर्ती के दिल में अपने बेटे की फिक्र और अजम की गर्मी थी
01:46सर मेरा बेटा पढ़ना चाहता है
01:48वो कागस पर खुबसूरत नक्षे बनाता है
01:51मुझे इसकी तालीम के लिए थोड़ा सा कर्ज चाहिए
01:55तेरा बेटा जो वड़ा पाउ बिस्ता है
01:57ये वही बेशने वाला घर बनाएगा
01:59हाए हाए
02:01सर में कुछ नहीं मान रही
02:03बस मेरे बेटे के खाब की फीस जमा करने की इजाज़त दे
02:06जमीनदार जोर जोर से हंसने लगा
02:10आरती के दिल में जिलत का घूंट उतर गया
02:14मगर उसके अजम की आग बजने नहीं दी
02:17रती घर वापस लूट आई
02:20जमीनदार ने ना सिर्फ कर्ज देने से इंकार किया
02:24बलके जिलत भी दी थी
02:26कर्ज ना देने का दुख नहीं
02:28मगर जो जिलत दी उसे में कभी नहीं भूल सकती
02:30मा तुम प्रेशान मत हो
02:33मैं जमीनदार को गलत साबित करके रहूंगा
02:35अर्जुन की आँखों में आंसु थे
02:38मगर मुठी बंद थी
02:40अजम और उमीद की रोशनी अब उसकी मायूसी पर गालिब आ रही थी
02:45अर्जुन के दिल में मायूसी और फिक्र का बोच था
02:49तब उसकी दोस्त मेरा आई
02:52जो हमेशा नए आईडियाज और हल सोचती थी
02:55अर्जुन तुम एकने घुसे में क्यों हो?
02:59मेरा तुम है क्या लगता है?
03:02तुम वला पाव बनाते होना तो फिर वला पाव का घर क्यों नहीं बना सकते?
03:08मेरा तुम क्या कह रही हो?
03:10ऐसा कुछ बनाओ के कालिज खुद तुम्हें बुलाए, नुक्री तुम्हारे पीछे आए
03:14और लोग तुम्हारे डिजाइन की तरीफ करें
03:16अर्जुन पहली बार एक अनोखा खाव देख रहा था
03:21एक खाव जो उसे ना सिर्फ जमीनदार के चैलिंज से निकालेगा
03:39और ठका हो, बेटा मुझे बहुत भूक लगी है कुछ खाने को दो, ये लो खा लो, तुम्हें सच में दिल से दिया
03:48इसलिए में तुम्हें एक राज दुखाना चाहता हूँ, ये दरख्त, ये जगा, खास है
03:54ये क्या है अब कौन है?
04:00ये फकीर सिर्फ फकीर नहीं, ये एक जादूई दुनिया का रहनुमा था, जो अर्जुन की नियत से मुतासर हुआ था
04:18ये एक जाद।
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