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  • 2 days ago
जनसैलाब के बीच हुआ अजित पवार का अंतिम संस्कार

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00:00इस भीड को देखे पुरी तरीके से हत प्रभू को कि जिसनी बड़ी संख्या में लोग वाएं कठा
00:05हुए हैं और यह बताया जा रहा है कि संख्या दो लाग से ज्यादा भी हो सकती है और रखेवल वहां पर लोग
00:10कठा हैं बलकि उनके आखों में आसु हैं रोते सुबक्ते में दिखाई पड़ रहे हैं और कुछ उनकी अपनी पार्ट
00:15के बड़े नेता जो बड़े बुज़ूर्ग है जो शायद अजीद पवार से भी ज्यादा उम्र के होंगे सकतर पिस्तर साल के हुए
00:20को भी मैंने देखा सुबक सुबक के रो रहे थे तो यह दर्शाहता है कि अजीद दादा पवार का अपनी पार्टी में कितना
00:25समान था और लोग उसे कितना प्रेम करते थे और खुद बारामती के लोग उसे कितनी महबत करते थे
00:30यहां तक मुलोग बताते हैं कि कोई भी छोटा साथमी जमन से मिलने कोशिश करता था तो वो उसे मिलते थे उसे बारामती
00:35चीट करते थे तो यह दर्शाता है कि जमीन से जुड़ा हुआ नेता अगर उसके
00:40के साथ कोई हाथसा होता है तो लोग कैसे कितना दुखी और परस्नल लास के तो पर महसूस करते हैं
00:45तक शरत पवार की बात है बार बार इस बात को दिखा गया कि बहले ही शरत पवार और अजित पवार की बीचे
00:50मतबेद थे भले ही दोनों अलग अलग पार्टी बना ली थी लेकिन परिवार के तौर पर वह
00:55हमेशा एक साथ रहे शरत पवार ने बार बार यह कहा कि हमारे भी पर राजनीतिक डिफ्रेंसेज है
01:00लेकिन परिवार एक है और इसमें शरत पवार का बहुत बड़ा हाथ था हला कि
01:05पवार के मन में हमेशा से यह कहीं न कहीं एक कसक्त ही कि कई ऐसे मौके आए
01:10थे जब शरत पवार उनको खमंत्री के तौर पर पेश कर सकते थे मुझे अच्छी तरीके से
01:15शादे निस ओठाने के बाज दूसरा विधान सबाग कर चुना हुआ था जिसमें
01:20पी को 71 सीटे मिली थी और उस वक्त कॉंग्रेस को सिर्फ 68 सीटे मिली थी तब शरत पवार ने
01:25तब चाहते तो शायद नसीपी का मुख मंत्री हो सकता था रजीप पाउल उसके सबसे बड़े दावेदार
01:30बन सकते थी
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