00:00Doha da Kabareki Kalla.
00:05the
00:07the
00:09the
00:10Rasyah Sanke
00:11Fadha Dikari
00:15جس میں Rasyah Sanke
00:16دو مہینوں کی موت ہوئی ہے
00:20अंदुलन करते करते
00:22उसकी जिम्मेदार है को
00:25अगर सरकार
00:25मानने को तयार नहीं है
00:28तो यह सोच ले सरकार
00:30ताना साहिए
00:30मतलब लोक तंतर में
00:33हर वेत्य को अपना
00:35बात रखने का अधिकार है
00:37और सरकार का फर्ज बनता है
00:40कि उनसे बात चित करे
00:41एक उचित समाधान निकाले
00:43आस्वासंदे
00:45और कहिन के
00:46उनके लिए
00:47आने वाला समय
00:50में
00:51जो उनकी मांगो है
00:52उन्हीं विचार करे
00:53और उनको पूरा करे
00:55अब सरकार रहा है
00:58कि किसान की मौत होती है
01:00तो उनको मानने को तयार नहीं
01:01आज अंदोलन करने
01:03धरना इस्तल पर मौत हुई
01:05और उसके बाद
01:06इस तरह की बयान
01:07मैं समझता हूँ
01:07सरकार की एक दिश्वाश
01:10दिवालिया मान सिकता है
01:11और सरकार की इस तरह की बयान
01:15गहर जिम्मेदारा ना बयान है
01:16बलकि सरकार को ततकार जाकर
01:18उन अंदोलन रहा है
01:20परत रस्वयासंग और डेड़
01:22अभिहरतियों से सिदा सिदा बात करनी चीए
01:25उन लोग से जूटे वादे किसने की
01:30गारेंटी का जूटा वादा क्यों
01:35उसी तरह डेड़ के अभिहरति
01:40जिनको सिफ नियुक्ति पत्र देना है
01:43वो लगातार
01:45एक मैने से अधिक हो गया
01:46वो आमरण अंसन पर बैठें
01:49लेकिन सरकार
01:50सुनने को तयार नहीं है
01:51सिख्षा मंत्रे के पास
01:52अपने अधिकार मांगने जाते
01:55वो घर से बाहर ने निकल पारे
01:56इससे दुर्भा क्या हो सकता है
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