00:00कोकिल
00:30मन प्रसन होता है सुनकर इसके मीठे बोल मनोहर
00:35मीठी तान कान में ऐसे आती है वंग्शी धुनी जैसे
00:42सिर उंचा कर मुख खोले है कैसी मृदु बानी बोले है
00:49इसमें एक और गुण भाई जिससे यह सब के मन भाई
00:55यह खेतों के कीडे सारे खा जाती है बिना बिचारे