00:00Ministry of Housing and Urban Affairs यानी CPWD और बंकिन चंद्र चटुपादियाई की वो तस्वीर जो जिने फूलों से उकेरा गया है वो आप देख रहे हैं वंदे मातरम क्यूंकि वही देड़ सौ वर्ष वंदे मातरम के वही इस वर्ष की थीम भी है और यह आनंद मट का वर्जिन वो संगीत था
00:21एक लौता एक ऐसा ऐसी जाकी होती है जिसको आप 26 जंदरी से पहले नहीं देख पाते हैं जिसकी जलब क्यूंकि यह ताजा फूलों से बनता है और बीती रात तक बन कर तयार होता है ताकि आज जब करतव पन पर यह नजर आए तो बिलकुल फ्रेश दिखे और इसलिए सब
00:51तव्यपत पर देख रहे हैं यह सूचना प्रसारण मंत्राले की जाकी है और भारत जो 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता है यह अभी भी इतनी सशक क्यों है क्योंकि यहां की जो गुरु शिश्य परंपरा थी ना वो शृति और स्वृति यानि आप अपने अध्यापक से अपने �
01:21है यह जहां की वो तर्शार है कि हमारा देश काफी पीछिता बटाच बहुत के साथ आगे बाड़ रहा है और मुझे यकीन है कि जो हम लोग जिस तरह हमारी इंवेस्टमेंट चल रही है रिसर्च जेवलोपेंट के अंदर एक एको सिस्टम को बिल्ड करने के लिए हम लो�
01:51केंदर शासित प्रदेश होते हैं जहां पर हुश सकता है कि आप न गए हो कर तब वपाकी को देखकर आप समझ सकते हैं कि वहा पर उस Sindhci पर क्या कुछ आपको देखने के लिए मिल सकता इतरा
02:02कुछ आपको देखने के लिए मिल सकता है, टेरा कोटा का प्रयोग कैसे किया गया है, यहां पर हस्त शिल्प किस तरीके की वहां पर होती है, वो सारी चीजें आपको पुडिचरी की इस जहांकी में दिख रही है, और खास कर क्योंकि जो चुनावी राज्ये हैं और केंदरश
02:32सूली पर चड़ गए, वंदे मातरम मा, मैं आपकी वंदना करता हूँ, मा, सुझलाम सुफलाम, मलय यजशीतलाम, शस्त शामला मातरम, चाहे खुदी राम बोस हो, या मदलार ढीप रहो, कैसे कोई वंदे मातरम का विरोध कर सकता है, यह समझ नहीं आता, क्योंकि पंकिन �
03:02और अब एक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति एक प्रदर्शन होगा, वंदे मातरम चुकि डेड़ सो वर्ष आज जो पूरे होने का वर्ष है, पूरे देश में अलग अलग जगे पर आयूजन और उत्सव चल रहे हैं, तो अब ये गीत और रित्त के साथ यहां पर ये प्रस्
03:32यानि की सेन्य समारों के साथ शुरूआत और उसके साथ ही समापन होगा, लेकिन उससे पहले ये प्रस्तुति हम आपको दिखाते हैं, जिसकी कुरियोग्रिफी भी बड़े लंबे समय तक चलती है, देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हुए, कलाकार अलग-अलग पहना�
04:02आते हैं, भी की बड़ती ही पाइन ऐस शुरूब झालग हैं, समी जी तरी कारोश शार्थारी की एसून भी लाधर र्लखत हैं, ये लग शून सिर्द्थनी वाइन विएकिराती ही नने वाल, हम उंप्रह्त। और र----?
04:17औरम फो प्र्मसी का सैस्ट्ट
04:30श्रीप बंकिम चंदर चेटर जी द्वारा रचित प्राता स्मरणिये वंदे मात्रम गीत को
04:48वर्षों से हर्शोर्ला से गाते भारतवासियों का हार्दिक अभिनान्दर
04:55वंदे मात्रम केवले गीत ही नहीं अपितु भारत की आत्मा की प्रतिद्वनी हैं जो हम भारतियों को एक सूत्रवे बानता रहा है और बानता रहेगा
05:08वंदे मात्रम गीत की एक सो पचासवी वर्ष कांट के शुब अफसर पर आओ हम सब एक सुर में भारत भूमी की इस गौरव पुर्म एवं अध्भुत रचना को उतकर्ष, उत्साह और शद्धा से नमन करें
Comments