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  • 5 days ago
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नाम सिर्फ नाम नहीं होते… वो एक दौर बन जाते हैं। मुख्तार अंसारी भी ऐसा ही नाम था। गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से निकले इस शख्स ने बाहुबल से विधायक तक का सफर तय किया और जेल में रहते हुए भी चुनाव जीते।

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00:00उत्तर प्रदेश की राजनीती में कुछ नाम ऐसे हैं जो सिर्फ नाम नहीं होते वो एक दौर होते हैं ऐसा ही एक नाम है मुक्तार अंसारी
00:18पूर्वांचल की मिट्टी से निकला यह शक्स कभी विधाय कहलाया तो कभी माफिया डौन उसकी कहानी सक्ता डर और अपरात के उस गठ जोड की कहानी है जिसने दशकों तक कानून को चुनौती दी
00:35गाजी पूर जिले के मुहमदाबाद में जन्मे मुक्तार अंसारी का परिवार राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता था
00:44पिता सुभान उल्ला अंसारी कॉंग्रेस से जुड़े थे लेकिन मुक्तार ने जो रास्ता चुना वो राजनीति से पहले बाहुबल का रास्ता था
00:5480 और 90 के दशक का पूरवान चल जहां ठेके जमीन और वसूली के लिए गोलिया चलती थी
01:01वहीं मुक्तार नसारी एक ऐसा नाम बन कर उबरा जिससे लोग डरते भी थे और जिसकी ताकत को मानते भी थे
01:09हत्या अपहरार और रंगदारी के आरोपों के बीच मुक्तार नसारी की सबसे चर्चित दुश्मनी रही ब्रामर बाहुबली कृष्णानंद राय से
01:20यह दुश्मनी सिर्फ दो लोगों की नहीं थी बलकि पूरे इलाके को सालों तक खून और दहशत में डुबोने वाली जंग बन गई
01:30सडके बंद होती थी बाजार सन्नाटे में चले जाते थे और आम आदमी दो ताकतों के बीच पिस्ता था
01:37लेकिन मुकतार अंसारी यही नहीं रुके उन्होंने समझ लिया कि असली ताकत बंदूग से जादा वोट में होती है
01:45साल 1996 में वे मौ सदर से विधायक बने और इसके बाद कई बार विधान सभा पहुचे
01:53हैरानी की बात या रही कि वे जेल में रहते हुए भी चुनाओ जीतते रहे
01:59उनके समर्थक कहते थे कि मुकतार गरीबों की आवाज हैं जो सिस्टम से लगते हैं
02:06वहीं विरोधियों के लिए वे कानून को अपने हिसाब से मोरने वाला माफिया था
02:11जैसे जैसे साल बीटते गए मुकतार अंसारी पर दर्ज मुकद्मों की संख्या बढ़ती गई
02:17हत्या से लेकर गैंगेश्टर एक्ट तक दर्जनों गंभीर मामले उनके नाम से जुड़े
02:242017 के बाद उत्तर प्रदेश में सक्ता बदली और उनके खिलाफ कारवाई तेज हुई
02:30उनकी अवैद संपत्तियों पर बुल्डोज़ चला सामराज तूटने लगा और संदेश साफ था
02:38अब बाहु बल का दौर खत्म होना चाहिए
02:41लंबे समय तक जेल में रहने के दौरान मुक्तार अंसारी की सेहत गिरती गई
02:47और साल 2024 में जेल में ही उनकी मौत हो गई
02:52उनकी मौत के बाद समर्थकों में मातम था
02:55तो विरोधियों के लिए या एक युक का अंत
02:59लेकिन असली सवाल यही रह गया
03:01क्या मुक्तार अंसारी एक जन नेता थे या अपराद की उपज
03:06सच शायद इन दोनों के बीच कहीं है
03:08मुक्तार अंसारी की कहानी हमें याद दिलाती है
03:12कि जब अपराद और राजनीती साथ चलते हैं
03:16तो लोगतंत्र कमजोर होता है
03:18डर के सहारे बनाई गई ताकत भले ही सालो टिक जाए
03:22लेकिन अंत में कानून और समय के आगे उसे जुकना ही पड़ता है
03:26या कहानी सिर्फ मुक्तार अंसारी की नहीं
03:29डर के सहारे बनाई गई ताकत भले ही सालो टिक जाए
03:33but in the case of the law and the time of the law is going to be shut down.
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