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  • 5 months ago
सवाईमाधोपुर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोराइड प्रभावित गांवों में करोड़ों खर्च कर लगाए गए आरओ प्लांट ताले में जकड़े पड़े हैं और मशीनों पर जंग चढ़ रही है। नतीजा यह है कि ग्रामीण आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। सरकार की लापरवाही और विभागीय मॉनिटरिंग की कमी ने जनस्वास्थ्य को गहरी चोट पहुंचाई है। बच्चों के दांत पीले हो रहे हैं, बुजुर्ग जोड़ों के दर्द से कराह रहे हैं और आंखों की रोशनी तक प्रभावित हो रही है। करोड़ों की योजनाएं कबाड़ में बदल रही हैं, जबकि आमजन की प्यास अब भी फ्लोराइडयुक्त पानी से बुझ रही है। झाड़ियों में घिरे ये प्लांट अब अनुपयोगी हो चुके हैं।

देखरेख के अभाव में मशीने हो रही कबाड़जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ो रुपए की मशीनें दखरेख व मॉनिटरिंग के अभाव में अब धीरे-धीरे कबाड़ में बदल रही हैं। लोगों ने शुरुआती दिनों में आरओ से पानी लेने की कोशिश की, लेकिन कस्बों और पंचायत मुख्यालयों से दूर होने के कारण धीरे-धीरे रुचि खत्म हो गई। पीएचईडी की प्रभावी मॉनिटरिंग और कंपनी की जिम्मेदारी न निभाने से हालात बिगड़ते चले गए।
फ्लोराइड से बढ़ती बीमारियां
फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से ग्रामीणों में कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। बच्चों और युवाओं के दांत पीले पड़ रहे हैं, बुजुर्ग और युवा जोड़ों के दर्द से परेशान हैं। कई गांवों में आंखों की रोशनी कम होना, समय से पहले बाल सफेद होना और दांत गिरने जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। ग्रामीणों नें कई बार जलदाय विभाग से शिकायत की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

ये बोले लोग...

तीन साल से बंद पड़ा आरओ प्लांट

गांव में स्थापित सोलर आरओ प्लांट पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ा है। प्लांट के ठप होने से ग्रामीणों को मजबूरी में फ्लोराइडयुक्त पानी पीना पड़ रहा है। इससे गांव में दांतों का पीलापन, हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों का दर्द जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। यदि जल्द ही आरओ प्लांट को दुरुस्त कर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले समय में हालात और भयावह हो सकते हैं।
लेखराज छाबड़ी, ग्रामीण निवासाी रजवाना

कबाड़ हो रहे आरओ प्लांट

सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर आरओ प्लांट तो लगवा दिए, लेकिन उनकी देखरेख और संचालन की कोई व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा यह है कि मशीनें धीरे-धीरे कबाड़ में बदल रही है। लंबे समय से आरओ प्लांट बंद होने से लोग सीधे हैंडपंप और अन्य स्रोतों से पानी ले रहे हैं, जिसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसके चलते ग्रामीणों में सिरदर्द, पाचन संबंधी दिक्कतें, दांतों का पीलापन और हड्डियों की कमजोरी जैसी बीमारियां आम हो गई हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है।
मुकेश गुर्जर, ग्रामीण निवासी गांव पांवडेरा

सात साल से बंद आरओ

गांव स्थापित आरओ प्लांट पिछले सात वर्षों से बंद पड़ा है। कई बार जलदाय विभाग और जिला कलक्टर को शिकायतें की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा यह है कि लोग आज भी मजबूरी में फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को विवश हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। आरओ प्लांट बंद होने से ग्रामीणों को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा। इससे लोगाें में रोष है।
रामराय चौधरी, ग्रामीण निवासी टापुर

शीघ्र चालू हो आरओ प्लांट

आरओ प्लांट के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए थे, लेकिन आज यह मशीनें कबाड़ बनती जा रही हैं। बार-बार शिकायतें कीं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण हालात जस के तस बने हैं। विभाग व प्रशासन की लापरवाही से ग्रामीणों का स्वास्थ्य खतरे में है और यदि जल्द ही आरओ प्लांट को दुरुस्त कर चालू नहीं किया गया तो आने वाले समय में बीमारियों का संकट और गहराएगा। बंद पड़े आरओ प्लांट शीघ्र चालू हो।
चौथराजसिंह राजावत, ग्रामीण निवासी झौड़ादा

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इनका कहना है...
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित आरओ प्लांट सात साल के लिए स्थापित किए गए थे। अब इनकी अवधि पूरी हो गई है। फिलहार सरकार की ओर से आरओ प्लांट के संबंध में दिशा-निर्देश नहीं आए है। ग्रामीण क्षेत्रों में ईसरदा व चंबल प्रोजेक्ट से पानी की आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे है।

भगवान सहाय मीणा, अधिक्षण अभियंता, जलदाय विभाग, सवाईमाधोपुर

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Transcript
00:00Let me sleep.
00:16How are you doing?
00:17Yes.
00:18How are you doing?
00:19I'm going to go home.
00:21I'm going to go home.
00:22No, I'm going to go home.
00:30I'm going to go home.
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