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  • 8 months ago
उत्तर प्रदेश पर्वतीय महापरिषद की ओर आयोजित उत्तरायणी कौथिग 28 जनवरी तक चलेगा.

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00:00लगनव के गोमती तट पर उत्राखन महत्सों का योजन किया गया है और ये महत्सों इसलिए भी खास है चुकि पहाड़ी छेत्रों की परंपरा, रिवायते, पहनावा और वहां की और हश्त, शिल्प और कारिगारों से लोगों को मुलाकात का मौका मिलता है
00:27और आप यहाँ पर पहाड़ी शेत्रों की वो तमाम चीज़े पाएंगे जो आसानी से दूसरी जगे नहीं मिल सकती
00:35तो आए जानते हैं कि लखनों वासी और आसपास के लोगों का इस महत्सों के तालुक से क्या कुछ कहना है
00:42और उत्राखंड के कारोबारी जो यहाँ आये हैं उनका क्या रियक्षन है और क्या विशेस है इस महत्तों में ये भी हम बताएंगे
00:51कपड़े बहुत खास हैं, रिजनेबल रेट में हैं, बढ़ियां हैं, नमखीन हैं, है तो बहुत कुछ
00:57चाजरे हैं, डाले हैं, राजमा हैं, महिए हैं लेकिन राजमा सुड़ा है
01:05पहाडी शेत्र की कुछ परंपरागत चीज़ें आपको दिखी हो
01:09परंपरागत भाई हैं, उनके प्रोग्राम दिख रहे हैं, लड़कियां दिख रही हैं, उनकी ट्यार उसकरी के जिद्रस में और वैसे ही, मेकप के साथ
01:16पहाडी खेला देखा, पिछोडी देखी, अभी तंगी सुना, और ये मेरी पहाडी दोस्टी है, और ये मेरी आउंटी हैं उनके डांस किया, बहुत अच्छा डांस किया, तो चपा आना चाहिए देखने, पहाडी कस्टम और ये सब चीज़ें ठीखने को मिरेंगी
01:43बहुत अच्छा लग रहा है, हम इते टाइम से लखनों में रह रहे हैं, और जब भी हम कुछ उत्राखन का देखते हैं, हमें बहुत अपना फील होता है, चाहे वो कल्चर हो, चाहे वो संगीत हो, या खाना हो, दाल से लेके, सबजी से लेके, गलबंद हो गया, पॉंची ह
02:13सबजी ले लीजे, सारी चीज़े इसनी टेस्टी है, पहनावा भी बिल्कुल अलग है, हमाई इनत हो गई, पहुंची हो गई, गलोबंद हो गया, जो बहुत डिफरेंट है और जगह से, सबशे अच्छा हमारा पहनावा है, पिछोडी का पहचान, शादी शुदा, जो है �
02:43पहुंची, लगनों के लोगुशे तो इतना पहाडी लोगुशे नाखुश है, बिल्कुल ज़ दिन का प्रोग्राम था, पन रहो गया, इसाद, सबी चीज की हो गया, जो जो समान मैंने रखा है, सबी चीज की बिक्री हो रहे है, यह अलग होता है, पहाडी पहनावा पहा
03:13साड़िया लाई है, क्योंकि उत्राखन की और तो ने मैं देख रही हूं, साड़िया पहनना बंद कर गया, सूटों में आ गई है, जो कि साड़ी हमारा कल्चर है, और मुझे साड़ी बहुत पसंद है, मैं साड़ी को प्रमोट कर रही हूं, और जैसे कि यह मेरी है, राजि
03:43यह पहाड की गढ़ेरी है, हमारी मूली है, माल्टा है, नीबू है, अद्रग है, और बाकिये सब हल्डी, मिच्चा, धन्या सब और गनिक है पहाड के
03:54वीडियो जैनलिस्ट विजे बर्मा के साथ खुर्शीद अहमत लखनव
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