00:00सफेद मून्चे, माथे पर तिलक और 26 सालों से हाथ में राजस्थान पत्रिका, चक्करगर, ओम्र केवल एक संख्या है, अगर मन में कुछ जानने की ललक जीवित हो, इस बात की जीवन्त मिशाल है पुलिस सेवा से सेवानिवरित 85 वर्षिये खेरुना निवासी कैलाश चं�
00:30कर्मी जैसी है, वर कहते हैं कि पुलिस की नौकरी में रहते हुए अनुशासन सीखा था और जब पत्रिका पढ़ना उनके जीवन का वही अनुशासन बन गया है, रिटायर होने के बाद इन 26 सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब उन्होंने पत्रिका नहीं पड़ी हो
01:00कर्मी जैस की विशेष्टा यह है कि वे खबरों को सिर्फ अपने तक्सीमित नहीं रखते, वे मोहले के सारवजनिक स्थानों पर बैठकर अन्य लोगों को भी मुख्य समाचार पढ़कर सुनाते हैं, पुलिस सेवा के संसकार आज भी उनकी जीवन शेली में जहलकते हैं, �
01:30अखबार के बिना उनका पूरा दिन अधूरा और बेचैनी भरा रहता है, खबरों की इसी प्यास को बुझाने के लिए वे कई बार खुद 15 किलोमीटर दूर शक्कर गड़ जाकर अखबार लेकर आते हैं, उनका ये जुनून दर्शाता है कि ग्यान और सूचना के प्रती �
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