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  • 1 day ago
जानिए अलवर की एक संस्था के बारे में, जो 13 सालों से ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों के जीवन को सरल बना रही है....

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00:00दिव्यांग और जरूरत मंद लोगों का जीवन सरल बनाना आसान काम नहीं होता
00:09लेकिन अलवर की एक संस्था बीते कई वर्षों से इस चनौती को सेवा और संकल्प के साथ साकार कर रही है
00:16संस्था का प्रमुख उद्देश दिव्यांग और नेत्रहीन लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है
00:22इसके तहट संस्था की ओर से अब तक तीन हजार दिव्यांगों को वील्चेर, ट्राइसाइकल, बैसाखी, सुनने का यंत्र, सहित अन्य सहायक उपकरन, निशुल्क उपलब्द करवाए गए हैं
00:35असो का फॉंडेशन 2013 में इसकी सुरुवात हुए थी और डॉप्टर सौनिय धीरजन के मन में विचार आया कि गाओं के छेत्र में हमें कुछ करना चाहिए
00:49सिख्छा में, स्वास्त में, चिकिसा में, नसा मुक्पी में
00:53तो 2013 में जब शुरुआत हुए इसके बाद छोटे छोटे कारे किये फिर 2017 के बाद से आई केंप लगवाना शुरू किया और जर्नल केंप जो हेल्थ केंप लगवाना शुरू किया
01:05इसके बाद फिर दिव्यांग सिविर भी लगवाना सुली गया जिसमें दिव्यांग भाई बेनों का करतिमांग और रुपतर प्रदान करवाया जाते हैं
01:16इसके अलावा जो इस्कूले हैं उनकी भौतिक सरचना में पूरा सुधार किया जाता है
01:22संस्था की ओर से अब तक जिले में विभन शिविरों में चिनहित करीब 6,000 लोगों के मूतियाबिंद के ओप्रेशन जैपुर में करवाय जा चुके हैं
01:42और ये विवस्था पूरी तरह निशुल्क रहती है
01:44संस्था की ओर से हजारों लोगों को कृत्रिम अंग लगाए गए हैं साथ ही उपकरन उपलब्ध करवाए गए हैं
01:52सुन्ये लाभार्थियों से
02:14साथ करें चाहिए तो मेरे पूर जुगारे प्लास्टिक करें मेरा उपसंद करता हूं आपने मदब
02:26सोदो सुन पर कमा लेता उसमें घर का जो खड़ते चल सकें इनके कानों में 15 साल पहले ही समस्या थी एक कम पनी थी उसमें काम करते थे जिसमें लोहा
02:35ऻोह की ढ़लाई कि ती लोहा गलाया जाता था सीसाउंड की प्रॉबलम के वर जैसे इनके कानों में प्रॉबलम हुई थी और इनको मलब धीरे धीरे पिल्कुल सुनाय देना बंड हो गया कान के पास जाके हम लोग बोलते हैं
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