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00:00आयोध्या के महाराज
00:02मत भूलो कह कही
00:05कि आयोध्या के महाराज
00:08एक मनुष्य भी है
00:10क्या तुम्हें
00:14मेरी पीडा का आवास नहीं
00:18कबसे
00:21हिले की सौपन तो संजोरी बैठे हैं हम दोनों
00:27जो आश तक पूरे नहीं हुआ
00:29महाराज
00:47कहते हैं
00:50भूर में देखे स्वपन अवश्य पूरण होते हैं
00:56आज भूर में मैंने एक स्वपन देखा महाराज
00:58उस वपन में नन्धे नन्धे पैर
01:02हमारे आंगन में चल रहे थे
01:06हमारे उपवन में
01:08हमारे कक्षों में
01:10गिलकार्या बूल जही थी महाराज
01:13आपकी संथान के
01:15संथान
01:21क्या उनमें
01:25कोई पुत्र भी था कह गई
01:28चारों महाराज
01:30मैंने इस वपन में आपके चार पुत्र देखे है
01:35रगुवन्च के चार वन्चज
01:38सच के खई
01:41चटायू
02:05में आपके पुत्र भी थी के पुत्र आपके खई
02:30मैं तुच आदायू
02:31मैं तो कि आपके खई
02:31कोई सूचना नहीं
02:43ऐसी क्या बात है जो अचानक आपको यहां खिंच लए
02:46युद
02:47इस मैं मुझे मेरे मित्र नेमे की सहता चाहिए
02:57दरणवंशी महावीर चटायूखो लेरी सहता की आवशक्ता है
03:02क्यों उपहास कर रहे हो मित्र
03:07उपहास नहीं है ये मित्र
03:09ये कोई साधरन युद्ध नहीं है
03:12स्वयम देवराजिंद्र ने मुझे आपके पास सहता लेने के लिए भेजा है
03:17क्योंकि संभासुर ने देवलोप में हाहाकार मचा रखा है
03:22उसके असुरों ने दंडक वन में च्छावनी वना ली है
03:27भेंकर असुरों से लदा है उसका विमान
03:29एक साथ तस दिशाओं से प्रकट होकर आक्रमन करता है वो मायावी
03:36देवराजिंद्र ने इसलिए मुझे आपके पास भेजा है
03:41क्योंकि अयोध्यापती नेमी के अधिरिक्त
03:44कोई भी उस संभासुर के उत्पात को समाप्त नहीं कर सकता
03:48क्या आप अपने मित्र की सहायता करेंगे अयोध्यापती
04:06आयोध्या की राजसमाबे उपस्तित सभी को इस बात की सूचना मिल चुकी है
04:22अइस सहता का उपतर देगि समरासुर के विरुप्ट इस युद्ध में मैं आयोध्यापती समिनित होने की खोशना करता
04:35शावा गरे महारागा
04:42डिजिटल मार्केटिंग अब सिर्फ बड़े ब्रैंड्स के लिए नहीं आपके लिए भी है
04:56हम अक्सर सोचते हैं कि शायद डिजिटल मार्केटिंग सिर्फ इन ही दुखों के लिए है
05:05य जिस्युत जिसिए आयोद्य के बेगो शंबंद ना हुँआ मैं और क्यों एद होना
05:11कि आयोद्यापति को अपने किसी निर्णा के लिए तर्ग देने का श्यक्ता है रिश्च माली महामंत्रि स्वुन
05:20महाराज ने हमें सभा में जन्ता के प्रतिनिधी के रूप में नियुक्त किया है
05:24और जन्ता के प्रतिनिधी होने के नाते और प्रजाहित के प्रश्णों का उत्तर देने के लिए राजा बात दे है
05:31कुल गुरु जबी हमारे प्रश्ण नीतियों के विरुद्ध है
05:35तो हम अपने प्रश्ण को वापस लेने की तयार हैं
05:39ये वर्ड बोले जहबाली
05:41सदा ही अनुचित प्रश्ण पूछते हैं
05:44राजा अपने निर्णे में
05:46प्रजा से सहमती ले
05:49यही नीती है
05:50आशा है महाराज
05:52आपके सभी प्रश्णों के उत्तर देंगे
05:55रिशी जबाली
05:57समागरे महाराज
05:58जन्ता का प्रश्णी ये
06:00यदि समरासुर जीतता है
06:03तो उसमें हमारी कोई हानी नहीं है
06:05और यदि देवतागर जीतते है
06:06तो उसमें हमारी कोई लाब नहीं है
06:08तो फेर इस युद्व में सम्मेलित होकर
06:11हम अपना धन और जन्शक्ति को क्यों वेर्थ करें
06:15रिशी जबाली
06:21अयुद्या के इस युद्ध में समलित होने के तीन कारण है
06:25पहला कारण मित्रता
06:28हमारे मित्र ने हमसे साहता मंगी है
06:32रगुवन्शी सदैव मित्रता का मान करते है
06:37दूसरा कारण
06:40तूर फैली अगनी को यदि बुछाया ना चाहे
06:44तो उसे निकट आने में अधिक समय नहीं लगता
06:49दंड़क वन अयुद्या से अधिक दूरी पर नहीं है
06:56और तीसरा कारण
06:58राजा का थर्म
07:00जो है प्रजा की हर संकट से रक्षा करना
07:05वो संकट
07:06जो सामने हो
07:09या वो संकट जो आने वाला हो
07:12इसी लिए
07:13अयो ध्यावर पजा के हित में
07:15समरा सुर के विरुद्ध
07:17इस युद्धकार नेत्रत्व आई स्वायम करूँदा
07:22रेशी जवाली
07:27आशा करता हूँ आपको आपके प्रश्णों के उत्तर मिल गए हो
07:31समा करें महाराज
07:36महाराज
07:42मेरा प्रश्णित्ता सरण नहीं
07:45उत्तरा अज़कारी के बिना
07:48महाराज राज नहीं छोड़ सकते
07:50ऐसा नहीं है कि हमें आपकी वीर्टा और कोशल पर कोई संदे है
08:02इन्तु नियती को कोई नहीं जानता महाराज
08:05यदि आपके साथ युद्ध में कुछ अनोनी हो गई
08:08तो आउध्या का क्या होगा
08:12रगुकुल का क्या होगा महाराज
08:15रेशी जवाली
08:18अयोध्या के सिंगासन पर बैठने की प्रथम योग्यता है
08:22धर्म की रक्षा
08:24नापी बंच की रक्षा
08:27आपकी चिंता है
08:31मेरे कुल के भविश्य की सुरक्षा
08:34किन्तु मेरी चिंता है
08:36मेरे कुल के पूरवजों के मान
08:38मर्यादा और प्रतिष्टा की रक्षा
08:40ए उन बाहराच अरिश्चंद्र का वंचजू जिनों ने सत्य की रक्षा के लिए अपने परिवार का त्याग किया
08:51उन भागिरत का वंचजू जिनों ने धर्म की रक्षा के लिए मांगंगा को प्रिध्वी पर उठारा
08:58धर्म पीर रगु का रक्त वो तेरी धमनियों में पहरा है
09:05तेरा वंच रहे ना रहे
09:10किन्तो रगुकुल के रीती नेमी कभी नहीं तोड़ेगा
09:16रगुकुल रीती सदा चली आई
09:24राज आए पर वचन न जाए
09:27पहराज नेमी की
09:30पहराज नेमी की
09:32प्राड जाए पर वचन न जाए
09:41बोजन के साथ सरीउक कजल रखी है ना
09:46उन्हें वही भाता है
09:47यूदि के लिए अचे लिए कवस तो रखी है ना
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