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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। सोमनाथ में ‘स्वाभिमान पर्व' में उन्होंने हिस्सा लिया। शौर्य यात्रा में और मंदिर में पूजा करने के बाद पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के एक नहीं बल्कि अनेकों प्रयास हुए। लेकिन, ना सोमनाथ नष्ट हुआ और ना ही भारत नष्ट हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के दूसरे दिन आज रविवार को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में मनाए जा रहे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत शौर्य यात्रा में शामिल हुए।


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00:00प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के तीन दिन के दोरे पर है।
00:30करते हुए कहा कि सौमनाथ मंदिर को नश्ट करने के एक नहीं बलके अनेकों प्रयास हुए लेकिन ना सौमनाथ नश्ट हुआ और नहीं भारत नश्ट हुआ।
01:00भारत को खत्म करने की लगातार कोशिश होती रही।
01:08लेकिन ना सौमनाथ नश्ट हुआ और नहीं भारत नश्ट हुआ।
01:18क्योंकि भारत और भारत की आस्टा के केंद्र एक दूसरे में समाए हुए है।
01:32आज सौमनाथ मंदिर की स्वाबिमान यात्रा के एक हजार साल पूरे हो रहे हैं।
01:36साथ ही 1951 में हुए इसके पुलर निर्मान के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं।
01:41इस दोरान पीम मोदी ने कहा कि बार बार मंदिर का स्वरूप बदलने की कोशिश की गई और हमें पढ़ाया गया कि मंदिर को केवल सौना लूटने के लिए ध्वस्त किया गया था।
01:51बार बार मंदिर का स्वरूप बदलने की कोशिश हुए और हमें पढ़ाया गया कि सोमनात को लूट के लिए तोड़ा गया था।
02:02नफ्रत अठ्याचार रातं का असली क्रूरी ट्यास हम से छिपाया गया।
02:10साथियों हमने धर्म के प्रती इमामदार कोई भी व्यक्ति ऐसी कट्रपंती सोच का समर्थन नहीं करेगा।
02:25लेकिन तुष्टी करने के ठेकेदारों ने हमेशा इस कट्रपंती सोच के आगे गुटने तेके।
02:34जब बारत गुलामी की बेडियों से मुक्त हुआ जब सरजार वन्लबाई पटेल ने सोमनात के पुर्ण निमार की सपत ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिच की गई।
02:50प्रधान मंत्री नरेंडर मोदी अपने दौरे के दूसरे दिन आज रविवार को गुजरात इस्थित सोमनात मंदिर में मनाये जा रहे सोमनात स्वाभिमान पर्व के तहत शौर्य यात्रा में शामिल हुए थे।
03:02ये एक अपचारिक शोभा यात्रा है जो सोमनात मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहूती देने वाले अनगिनत योध्धाओं को श्रधानजली अर्पित करने के लिए आयोजित की जाती है।
03:13शौर्य यात्रा में 108 घोडों का प्रतीक आत्मक जुलूस निकाला गया जो वीर्ता और बलिदान का प्रतीक है।
03:20इसके बाद पीम मोधी सौमनात मंदिर में पहुँचे और यहां उन्होंने दर्शन करके पूजा अर्चना की।
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