00:00इस राज को और जो हमारे थादर्नी गुरूजी का सपना रहा है हमारे जो संगर्स के लिए अगरिनी नेताओं का जो सपना है वो सपना साकार कैसे हैं आज हम लोगों के लिए एक प्रिणादाई
00:30और एक संकल्प लेने का एक दिन है ताकि हम अपने आदर्सों के बिचारों को जीवीत रख सके और इस राज का जो साविमान है उसको और उचाई तक नहीं पहली बार
00:53तो जी इसमें जैन्दी के इस उसर पर हम लोगों के साथ आज हम लोगों के बिच भी नहीं
01:05हम लोगों के नहीं
01:15निस्पुम से बहुत बड़ी एक खालिपन एक वैक्यूम सा मैसूस हो रहा है लेकिन विधी का विधान है जो लोग आए हैं उनको जाना है
01:38लेकिन आदनी भूली का जो कद था जो इनका इत्यास था जो जीवन काद में तरीके से बच्पन से लेके जवानी से लेके बुढ़ा के तक जो उनका संगर्ष रहा है
01:55वो संगर्ष ऐसी दुरूप से एक इत्यास है जो कहते हैं इत्यास लिखना इत्यास पढ़ना बहुत थादरनी बात
02:14लिखने के दिहाद बराना अपने आप में बहुत बड़ी बात बहुत है कि कम मैंसे चीज़े देखने को मैं आज गुरूजी ने अपना इक दिहाद बराया
02:33और इस संगर्ष का साथ की पुरा जार्खन परदेश पुरा देश रहा है और
02:47मुझे लगता है इस तरीके से एक आदिवासी संब्दाइश जो सदियों से
03:04यह समाज कई सारे परतार्णों का शिकार रहा है उस समू से एक ऐसे व्यक्तिक निकलना जो उस कंजोर समाज की आवाज बनता है
03:25और वो हर वर्ग जो परतारित होते रहे हैं उनकी आवाज बनता रहा है
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