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  • 20 minutes ago
सोमनाथ में शिव भक्तों की भीड़, शौर्य यात्रा में शामिल हुए पीएम मोदी

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00:00ब्रचेश लगवा कितनी दूर प्रधार मंद्री ऐसे जाने वाले हैं।
00:30ब्रचेश लगवा कितनी दूर प्रधार मंद्री दर्शन करेंगे।
01:00ब्रचेश लगवा कितनी दूर प्रधार मंद्री आज करेंगे।
01:30क्योंकि उनके लिए भी जहां पे आप अपने घरों में मौजूद हैं आप भी इस महापर्व का हिस्सा बनेंगे।
01:36कि अगर आप कलपना कीजिए कि 17 वर्ष में आदमी क्या जानता है और कितना कुछ कर सकता है और कहां तक टकराने की लड़ने की सोचता है।
01:46अगर वीर जी गोहिल 17 वर्ष की उम्र में विदेशी आकरांताओं की ताकत की तरफ के सामने फॉलाद बनकर खड़े हो गए इसी सोमनात मंदिर के बचाने के लिए।
01:56तो आप कलपना कीजिए कि वो भाव क्या है वो वीर भाव क्या है जिसका आज सम्मान किया जा रहा है और उनी वीर जी गोहिल के चौक से भी अभी कुछ देर में प्रधान मंत्री गुजरेंगे और उसके बाद वो आगे बढ़ेंगे शौरे सभा के लिए जहां पर प्रध
02:26गज़ जहां मंत्री पार के लिए बढ़ेंगे!
02:56कि आदन भी देख रहे हैं आप गंटियों की आप बंत्रों चार भी सुन रहे हैं यह भारत है वो भारत है जिसकी सभिता ने हजार वर्षों तक आकरांताओं को छेला लेकिन
03:15सभिमान के साथ फिर खड़ा हुआ और यह अनेकों वर्षों के उस जो आप कह सकते हैं संघर्ष का पर्व है जिसमें हम उन्हें समानित कर रहे हैं जिनोंने लोहा लिया जो खड़े रहें अडिक होकर जिनोंने अपने जीवन का दान दिया सिर्फ इस सोमनात मंदिर को जिसको
03:45को देखते हैं ओम जी आप इस लवे को किस तरह से डिस्क्राइब करेंगे आपके लिए इसका क्या अर्थ है और जब क्योंकि इतिहासकार कहते हैं कि इतिहासकारों को भी बहुत मिश्पक्ष होना चाहिए अब उस पर भी एक पूरी बहस छड़ गई है इस पूरे देश मे
04:15का अनाद है और यह निश्चित रूप से किसी भी सनातनी को किसी भी भारत वासी को अभी बूट कर देने वला चण होता है भी जब आपने टेज ध्वनी में चलाने के लिए कहा और टेज द्वनी हमने सुडियों में सुना तो जिस तरह का भाव जिस तरह का संचार हुआ त
04:45तो है ही ये प्रथम जोतेवलिंग है जिसके लिए हम कहते हैं सोम नाठो नरो द्रिष्टवा सर्व पापो प्रमुच्चते दर्शन मात्र से हमारी संकल्पना है कि मनुस्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है एक बात दूसरी बात जब मैं अन्जना जी नरेंद्र मोदी ज
05:15सितंबर के अखबारों को उनने सोनब्बे के 24 सितंबर के अखबारों को पलेट के देखिएगा कोई हल चल नहीं थी लेकिन 25 सितंबर 1990 को जब भगवान राम के लिए अजुद्ध्या के लिए रत्यात्रा सुरू हुई लाल क्रिस नाडवाणी जी की और उस समय नरेंद्र म
05:45पहले तक जिस तरह का सन्नाटा था और उसके बाद जो जन सहलाब पूरे गुजरात में उम्ड़ा आस्था का धर्म का भगवान राम तक सोमनाथ से लेके भगवान राम तक पहुचने का जो एक जन सहलाब उम्ड़ा था उसके बाद प्रमोध महाजन जी को उस समय पढ़ि
06:15राम के अजुद्ध्या की रथयात्रा 25 सितंबर 1990 को शुरू हुई और आज ये सोरियात्रा उसी सोमनाथ से उसी वेरावल कस्वे के पास आप किस तरह से इसको देख रहे हैं संगीत रागी जी और जैसे ही ब्रजेश जुड़ते मुझे बताईएगा अब ये शोरियात्रा
06:45आज और युझा तो रहे कोई फर्क नहीं पड़ता है हमको अपने पर कंविक्षन है या नहीं
06:49दूनिया मेरे बारे में क्या सूच रही है उसके आधार पर हम अपने विचारों का निरने करें ये ठीक नहीं है
06:56हम ठीक दिसा में जा रहे हैंने, मैं बार-बार कहता हूँ और फिर दूर आ रहा हूँ, जिस देश को अपनी सभ्यता, संस्कृति, अपने सस्त्र और सास्त्र, जिस पर विश्वास नहीं हो, वो देश पराभो की तरफ में उड़ गाता है।
07:12अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति पर गर्व करना, अपने सास्तों पर यकीन करना और अपने सस्त्र पर यदि जीतना है, तो आपको अपने सस्तों पर विश्वास करना पड़ेगा।
07:42को एक प्रकार से प्रधान मंत्री नर्यंद्र मोदी सुद्रड कर रहे हैं।
08:12का केंद्र तो था ही, अर्थ और संपदा से भी प्रचूर भरा हुआ था, जिसके सांस्कृति आर्थिक बैबो के बारे में इतना जिक्र किया है, अलबरुनी ने लिखा है, बाद के हिस्टोरियंस ने लिखा है, उसके उद्धारन मिलते हैं कई, और तब लगता है कि यह कि
08:42मंदिरों के सिर्फ पूजा पाठ का किंद्र हम जिनों ने हम लोगों ने समझ रखा है, वो बिल्कुल ही ऐसा नहीं था, वहाँ पर जो है, वो मेडिसिन की भी विवस्ता रहती थी, वहाँ पर सास्त्र के सास्त्र जो है, वहाँ युद्ध कला भी सिखाई जाती थी, यह सा
09:12जिसे ओम जी ने कहा ने छुपा रखाता, तो भारत के अंदर जो है, इस्लामिस्ट हिस्टोग्राफी और इंग्लिस हिस्टोग्राफी और जो लिफ्ट हिस्टोग्राफी, तीनों कनवर्ज करता है, क्योंकि यह तीनों जो है, भारत के सांस्कृतिक बैद्वों को कितना र
09:42लेखा काकर के भारत के बारे में जब जिक्र करता है तब जाकर के हमको लगता है कि अरे हम वाकिए ऐसा थे
09:47स्वामी विवेका नंजी ने एक बार कहा था जब तक हमें बाहर से कोई कोई प्रमान पत्र नहीं दे देता है
09:54तब तक हमें अपने उपर ही यकीन नहीं होता है कि हम हैं जो हैं सो हैं
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