00:00पूरी दुनिया में ग्लोबल वाम्मिंग की वजह से टेंशन बढ़ी हुई है जिससे देवुमी उत्राखन भी अच्छूता नहीं है वहीं बदलते इस मौसम ने उत्राखन के किसानों की परिशानियों को भी बढ़ा दिया है दरसल उत्राखन में जलवायो परिवर्तन के का
00:30परिप से जुड़े किसान तो इस बार भारी नुकसान होने को लेकर आशंकित है ऐसे में किसान आस्मान पर टक-टक ही लगाए हुए है बागवान हो एपल फार्मिंग करता हूं एपल और कीवी पर जैसा कि बिगर दो वर्सों से बर्फवारी नहीं होने की वजह से हमारी �
01:00नहीं होगी तो हमें जितने घंटे चीलिंग आवर चीए ऐपल के प्रोडेक्शन के लिए उतने घंटे हमें नहीं मिल पा रहे हैं जैसे कि हमें कम से कम
01:08एक हजार से सोलसो घंटे का चिलिंग आवर चीए उसके लिए माइनस से नीचे टेंप्रेचर होना चीए जो अभी इतना परियापत मात्रा में नहीं मिलता है शाथ की साथ अगर हम बरफवारी नहीं होती है तो बहुत सारे कीट पतंग ऐसे होते हैं जो समापतनी होते हैं जै
01:38अक्टूबर महीने में कुछ स्थानों पर हुई हलकी बारिश के बाद दिसंबर महीने में हलकी बरफवारी देखने को मिली लेकिन ये खेती किसानी करने वाले काश्तकारों के लिए परियापत नहीं है क्योंकि उनकी पूरी पैदावार ही मौसम पर निर्भर रहती है
01:57सेब की पैदावार के लिए कम से कम 1000 से 1600 घंटे का चिलिंग पीरियड जरूरी होता है जिसमें तापमान 0 से नीचे करीब माइनस 60 डिगरी सेल्सियस तक पहुँचना चाहिए
02:10जलवायू परिवर्तन के कारण कैक्षेत्र पहले से ज्यादा गर्म हो रहे हैं जिससे वहां सेब की खेती मुश्किल होती जा रही है
02:18यही वज़े है कि ग्लोबल वॉमिंग का सबसे गहरा असर सेब किसानों पर देखने को मिल रहा है
02:24यही नहीं पहारी क्षेत्रों में गेहूं, जौ और मटर जैसी फसली भी खत्रे में है
02:30नमी कम होने से पैदावार प्रभावित हो सकती है
02:34इसका नतीजा यह है कि खेती और बागवानी दोनों ही संकट में आ गई है
02:38जानी ऐसे में उत्राखन के क्रिशीव अमध्यान मंत्री ने क्या स्वाशन दिया
02:43सरकार भी इसके लिए जित्वित है
02:46और विल्टू प्रभू से प्राट्पना है कि जैसा कि मसमें होगा दुमान दे रहा है कि
02:54दो एक दिन के अंदर बरबारी शुरू हो जाएगी
02:56पहार के किसानों को आने वाले दिनों में मौसम ने राहत नहीं दी
03:22तो उनकी चिंताए बढ़ना लाजमी है
03:25देरादून से ETV भारत के लिए नवी नुन्याल
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