00:00बीस साल के बाद ये रियूनियन ये क्या राजनेतिक रियूनियन कहे बारिवारिक रियूनियन कहे या मजबूरन रियूनियन कहे पचीस साल जिसके साथ हम थे और सबसे खराब समय उनके जब चल रहे थे तब उनके साथ थे जब ध्रश्चचार विरोधी सब हम लड़ रहे �
00:30आपके विचारदारा में क्या फर्ख है तेकिन मैं यही कह रहा हूँ जिसे अभी अजीद दाद और पवार साब हो या हम और वो हो या बीजेपी और हमारा हिंदुत हो हम सारे अलग अलग पार्टी से
00:38काम करने की पद्दती हो या विचारदारा हो कभी सिमिल हो सकती कभी डिसिमिल हो सकती लेकिन एक बात तो मैं यह मान के चलता हूँ
00:46कि अगर दो परिवार, दो भाई
00:49या दो परिवार अगर पवर साप की बात करे
00:52ये साथ में आने में किसी को दिक्कत हो, किसी को आपती हो
00:55तो वो मुझे नहीं लेखता ठीक इंसान है
00:58हाँ, politically बात बनती है, बिगडती है, सारी बाते होती है
01:02लेकिन परिवार को तोड़ना, ये किसी ठीक इंसान का काम नहीं होता है
01:07और मुझे लेखता है कि अगर कोई साथ में आ रहा है, तो दिक्तत क्या है बाजपा को
01:10मैं तो पूछ रहा हूँ आपसे, कि ये कैसे हुआ
01:13मैं आपकी बाद नहीं बाजपा को पूछ रहा हूँ
01:32यही होता है न आपकी ये नेटो जैसी बात नहीं है, ये ऐसे भी है ना कि अगर आप देखे तो अभी के नगर पाले का नगर पंचाय चुनाव में और अभी भी नगर देगम के चुनाव में
01:42देविंदर फणनविस साब, अजीद दाधा और मिंदे एक दूसरी की आलोचना कर रहे है, एक दूसरी को भरष्ट बोल रहे है, एक दूसरी के कपड़े उतार रहे है स्टेज पर, एक दूसरी के कारेकरता उनके लड़ रहे है
01:53और तो भी सत्ता के लिए एक साथ चिपके हुए
01:55हमारे हाथों में ना सत्ता है ना कुछ है
01:58हम आये हैं मुंबई के हिद के लिए महारशे के हिद के लिए
02:00दो ठाकर अगर एक साथ आये
02:02पवार साथ का आशिरवाद साथ में हो
02:04तो क्या दिख्ट है मुंबई करसाथ में है तो क्या पख्रेत है
02:06हम सत्ता के ले चिपके नहीं है ऐसे
02:09जैसे ये तीन दोग चिपके हुगा है
02:10मैं आज भी चलो कहता हूँ
02:12इतने खराब खराब बातों में
02:14शब्दों में इन्होंने एक दूसरे की आलोचना अभी
02:16पिछले दस दिनों में की है
02:17कि इनमें हिम्मत है कि कोई इस्तिफ़ा दे के सरकार के बाहर बैठ जाए
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