Skip to playerSkip to main content
  • 2 days ago
जो चीज़ प्रिय हो गई हो, उसी में मूर्छित रहना, उसका नाम लोभ है। वह चीज़ प्राप्त होने पर भी संतोष नहीं होता। इस लोभ और लालच से कैसे बचें? क्या धन खर्च होगा, तभी बढ़ेगा? पैसों का सिद्धांत क्या कहता है, आइए जानते हैं इस विडीयो में।
Transcript
00:00लोग को तोड़ने के लिए दो रास्ते हैं
00:23एक तो आपको जब पर्चस नुक्सान हो जाए
00:29इतनी बड़ी नुक्सान हो जाए
00:31इतनी बड़ी नुक्सान हो जाए
00:32कि आप किसी भी तरह से वह नुक्सान को भरपाय नहीं कर सकते हैं
00:36beyond limit
00:39तो वह तोड़ जाती है रंथी लोग की
00:45फिर होता है करेया
00:47ऐसा कभी पैसे के लिए दंदे नहीं करना है
00:50जो भी सुकी रोटी चटनी मिली तो बहुत हो गया ज्यादा कुछ नहीं जहिए ऐसा करके वो लोग उसका तूटता है तो ये बहुत बड़ा नुकसान वात तो तूट सकता है लोग और आप कोई अच्छे रास्ते सत्कारे में आपके पैसे दान में दे दे तो आपकी लोग क
01:20तो नुकसान करके इतना भुगतने का अपने सर पे लेके हमारी लोग की गरंती तोड़ना उससे कई गुना बैतर है कि हम दान में पैसे दे कर हमारी लोग की गरंती तोड़े तो ये सिधा समझ में आता है तो काम बन जाता है और नियम ऐसा है कि जिसके हाथ से जहाँ पैसे
01:50अगर आपका घर में कमरा है आपका
01:56तो उसको आप एक तरफ सरते दो दरवाजे हैं
02:03एक दरवाजा खुल रखा और एक दरवाजा बंद कर दिया
02:08तो क्या हवा आपकी कर घर में आएगी?
02:11नई आएगी
02:12हाँ, अगर आपको नई फ्रेश हवा चाहिए
02:16तो दूसरा दरवाजा खोलना पड़ेगा
02:19तो पुरानी जाएगी और नहीं हवा आएगी
02:23जाने के लिए रास्ता पहला चाहिए फिराने के लिए रास्ता
02:28पैसे का भी ऐसा ही है
02:32पैसे जाते है तब आने की शुरूरत होती है
02:36और आते हैं तो समद्ना भी जाने की तयारी हो रही है
02:41देशा नियम है उसका
02:44आये तो समद्ना जाने की तयारी हो
02:48जाने लगे तो समद्ना वापस आने की तयारी हो रही है
02:52यह पैसो का सी धांत है
Be the first to comment
Add your comment

Recommended