00:00जैसे हरे बरे बाग में कोई ना कोई सबसे खुबसूरत फूर अक्सर सब के अकर्शन का केंदर बनकर हवा में लहरा रहा होता है।
00:12वैसे ही लोगों की भीड़ भड़े महले में एक जैस्मिन नाम की खुबसूरत कलीबी महले के हर मर्द के अकर्षन का केंदर बनकर रहती थी।
00:42वैस्मिन को फूलों और पेड़ पौद्वों से बच्पन से बड़ा लगाओ था। इसलिए अक्सर वो अपने घर में फूलों के गुलतस्ते सचावट के लिए इस्तमाल किया करती थी।
00:57मगर इस बार मौसम के बदलाव के कारण उसके घर का बगेचा एकदम अस्वियस सा हो गया।
01:07जिसे अब कोई होनहार माली ही सुधार सकता था।
01:15अरे ये कहानी तो मेरे जैसे किसी होनहार माली की लग रही है।
01:21इसे घर चाके पढ़ता हूँ आराम से पहले काम खतम कर लेता हूँ।
01:37अरे ओ, सुनो, तुम माली ही हो।
01:50जी मैडाम।
01:51रुको मैं आ रही हो, मुझे काम है।
01:53आये।
01:54अरे इतनी खुबसूरत लड़की तो हमने आस तक ने देखे।
01:58बगवान ने क्या चीज बनाई है।
02:01क्या बात है। ऐसी भी होती है।
02:05आस तो मसा आ जाएगा।
02:07आने दो।
02:09अच्छा वो तुम मुझे दिख गए।
02:24मुझे ना अपने घर के बगीचे में कुछ काम कराना है।
02:27हर पौदे में कुछ ना कुछ प्राबलम हो रही है।
02:29अरे कोई बात नहीं मेडम।
02:43मैं आभी सब देख लेता हूँ।
02:45आओ।
02:51ये देखो ये सब सूप रहे हैं।
02:53अरे में साब आप फिकर मत करो।
02:57इन सब को तो कैची से अपनी न हम यूं यूं सुधारतेंगे अभी।
03:01ठीक है। और ये देखो इसमें तो आजकल बहुत ही कम फूल आते हैं।
03:07ये देखो।
03:09अरे में साब जब आप जैसा फूल इस घर में हैं तो भाकी के फूल खिलने की हिम्मत कहां से करेंगे।
03:17माली होकर भी तारीफ अच्छी कर लेते हो। आरे में साब भागवान जूट ना बुलाए। ये सब तो इन फूल पोदों के साथ बस रहने का नतीजा है।
03:26क्या हुआ। देखने रहे काटा चुप गया कितना खून निकल रहे।
03:32जैसे गुलाब के फूल की सुरक्षा के लिए हमेशा काटा उसका साथ में पाता है।
03:43वैसे ही माली गोपी जैसमीन की उंगली के दर्द को कम करने के लिए उसकी दवा का काम करने लगता है।
03:52क्या हुआ।
04:20अरे बस भी करो मेरी पूरी बड़ी का खून ची उसलोगी क्या।
04:24अरे मेम साब मैं तो बस खून रुकने का इंतजार कर रहा थ।
04:27अहां ठीक है।
04:28अरे मैं तो भूली गई।
04:30मैं कपड़े सुखा रही थी।
04:32अच्छा ही काम करो जी।
04:33यह सारे गंबले खाली पड़ें तुम इन में पौदे लगा लो और यह कटिंग छटाई का सब काम कर लो मैं जब तक कप्ड़े सुखा के आती हो।
04:40ठीक है।
04:41अच्छे से करना।
04:42जी।
05:07इसमें खाट डालके फिर से इसको हरी बरी करना पड़ेगा।
05:10एक काम करता हूँ, पहले पानी डाल देता हूँ।
05:14हलो, हलो, हाँ कब तक आ रहे हो।
05:28अरे सौरी यार, वह आज शाम को मैं तुम्हारे साथ न फंक्शनल बने जा पाऊँगा।
05:31तुम मैं खेली ज़ली जाना। समझी।
05:33यार, एक कोफिशनल मीटिंग आ गई है। उसके लिए बाहर जाना पड़ेगा।
05:37वैसे भी तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम कहां है।
05:40सौरी।
05:41मैं अके लिए चली जाओ।
05:50अच्छा, यह है नल।
06:10एक काम करता हूं।
06:14बोदो को पानी तो देही रहा हूं।
06:16बैठे बैठे किताब भी पड़ी लेता हूं।
06:18जैसे किसी नर्के शुकरानों किसी मादा के शरीद में जाकर,
06:36नए जीवन की उत्पती के कारिये में लग जाती है।
06:40वैसे ही माली गोपी के अंदर गया हुआ है जैसमिन का रसीला खून।
06:46उसके अंदर संभो की तिवर इच्छा पैदा करने लगता है।
06:53गोपी ऐसे मत छेड़ो मुझे, मेरा मुझ पहले से ही बहुत खराब है।
07:08अरे मेडम जी, मैं छेड़ कहा रहा हूँ आपको।
07:11मैं तो बस आपको ये बताने की कोशिश कर रहा हूँ,
07:15कि फूल खिला हुआ अच्छा लगता है, मुर्चाय हुआ नहीं।
07:19अब कोई परिशान करेगा तो ऐसे ही होगा।
07:24तो मेडम, फिर ये माली किसलिए है।
07:28माली का तो काम ही होता है।
07:31मुर्चाय वो फूलों को फिर से खिला देना।
07:34अब माली गोपी अपनी चिकनी चुपडी बातों की खात से।
07:47जैस्मिन के मुर्चाय हुए चैरे को फिर से खिलाने की कोशिश करने लगता है।
07:53और अब जैसे जैसे माली गोपी के होट।
07:57गोपी! अरे गोपी सुनो!
08:00यह क्या हाल कर दिया तुमने मेरा।
08:07सामने देख तो लिया करो कुछ करने से पहले कौन घड़ा है।
08:13मैम साथ, गल्ती होगी मैम साथ, माप कर दो।
08:18मुझे पता ही न चला कि आप आ रहे हो।
08:20अब तुम्हारी वज़े से न, मुझे फिर से कपड़े चेंज करने पड़ेंगे।
08:24खाम खाम मेरी हो जासे मैम का मूड खराब हो गया।
08:40मैं भी क्या करूँ यार।
08:42वैसे बगीचे का जातर काम तो होई गया है।
08:44बाकि जो मैम आगे बताएगी कर दूगा।
08:46अब जो होना था हो गया।
08:56अब इसके आगे की कहानी पर दूगा।
09:06गोपी की तेज धारदार पाइप के पानी से भीक कर जैस्मिन वहां से चली जाती है।
09:11मगर अपने भीगे हुए हर एक अंकी छाप गोपी के रोम-रोम में छोड़ जाती है।
09:17जैसे एक बीज जमीन में अंकुरित होकर एक बड़ा पोदा बनने लगता है।
09:23वैसे ही अब जैस्मिन के गुमबाट जैसे भीगे जिसम की चलक गोपी के तन मन में समफोक के विचार पैदा करने लगती है।
09:32कहां खोई हुए हो सारा काम छोड़कर।
09:43मैंने तुम्हें गार्डन का सारा काम खतम करने को बोला था और तुम इस किताब में खोई हुए हो।
09:52जरा देखूं तो सही कौन सा ग्यान ले रहे हो इस किताब से तुम एसी घटिया किताब बढ़ते हो।
10:03बड़े ही धर्की किसम के इंसान हो तुम निकल जाओ अभी यहां से मैं मैं ऐसा इंसान नहीं हूँ।
10:10मुझे अच्छे से पता है तुम कैसे इंसान हूँ। अपना भोरिया विस्तर लो और निकलो यहां से।
10:17हां।
10:19हां।
10:21हां।
10:35हां।
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