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Magh Mela 2026: कड़ाके की ठंड और सुबह की धुंध के बीच आखिर क्यों संगम तट पर उमड़ रही है लाखों की भीड़? जानिए माघ मेले की वो अनसुनी कहानी और धार्मिक मान्यताएं जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम बनाती हैं।
धर्मनगरी प्रयागराज एक बार फिर भक्ति, विश्वास और परंपरा के महासंगम का साक्षी बन रही है। माघ मास के पावन स्नान के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर पहुंचे हैं। हर-हर गंगे के जयघोष के बीच कड़ाके की ठंड में भी भक्तों की आस्था कम नहीं हो रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माघ मेला क्यों मनाया जाता है?
About the Story:
Magh Mela is a major annual festival held at the confluence of the Ganges, Yamuna, and Saraswati rivers (Sangam) in Prayagraj. Millions of devotees take a holy dip during the month of Magh, seeking spiritual purification. This video explores the historical origins, religious significance, and the deep-rooted traditions of the Magh Mela 2026.

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Transcript
00:00कडाके की ठंद, सुभे की धूद और गंगा घाटों पर उम्री आस्था की अपार भीड, धर्मनगरी, प्रियाग राज और हरिद्वार, एक बार फिर भगती, विश्वास और परंपरा के महा संगम का
00:29साक्षी बन गई है, माग मास के पावन सनान के लिए देश के कोने कोने से शरधालू गंगा किनारे पहुचते हैं, जहां हर हर गंगे की जैगोश के बीच गंगा सनान कर पुन्य अर्जित किया जाता है, लेकिन कभी आपने सोचा है ये माग मेला क्यों मनाया जाता है, इसके �
00:59मेला दौधार चब्दिस जो है प्रयागराज में लगा हुआ है लेकिन फिशनी प्रमापरा खो, इन पड़िक्वक केंदा है कि घंवरी नगरी चांत के मेला ज्किक्ञा
01:22मेला श्रद्धा, तप और मोक्ष की कामना से जुड़ा हुआ है। मान्यता है इस महीने में गंगा स्नान करने से पापो का नाश, आत्मिक शुद्धी और मोक्ष की प्राप्ती होती है।
01:32माग मेला का धार्मिक महत्व जो है हिंदू धर्मगरंतों के अनुसार माग मास को सबसे पवित्र महीनों में से एक माना गया है। कहा जाता है कि देवता भी इस महीने में गंगा में स्नान करते हैं।
01:45विशेश रूप से मकर संक्रांती, पोश्टोर्णिमा, मौनिय ममस्या और बसंत पंचमी जैसे स्नान पर्वों का विशेश महत्व है।
01:55इन तितियों पर स्नान दान और जब करने से कई जन्मों के पाप कर जाते हैं।
02:00लेकिन इससे जुड़ी सबसे इंट्रेस्टिंग कहानी आखिर कैसे हुई माग मेले की शुरुआर ये बताने से पहले आपको इसकी धार्मिक मान्यता बताते हैं।
02:25पुलेक पुराणों और महाभारत काल से मूता है। ऐसा माना जाता है कि देवासुर संग्राम के बाद अमरित कलश की बूंदे जो हैं वो गंगा तट पर गिरी थी।
02:35तब ही से हरिद्वार को और कुछ बूंदे जो हैं प्रयाग राज में भी गिरी थी। तो हरिद्वार और प्रयाग राज तोनों को मोक्ष दाइनी नगरी माना गया।
02:44और यहां माग मास में सनान करने की परंपरा शुड़ी है। यह मेला कुम और अर्ध कुम के बीच के वर्षों में आयोजित होता है जिस से धार्मिक परंपरा निरंतर बनी रहती है।
02:56अब इसके बाद अगला सवाल जो आपके मन में रहता होगा, कब और कितने दिन चलता है ये माग मेला?
03:01आपको बताते हैं कि माग मेला आम तोर पर पॉष पोर्णिमा से माग पोर्णिमा तक चलता है, जोरान प्रते दिन गंगा सनान, संतों के प्रवचन, यग्य भंटारे और धार्मी का रुष्टान होता है, विशेश सनान परवो पर लाखो श्रधालू गंगा सनान करने पहुं
03:31कि समय बदला है, दौर बदला है, लेकिन गंगा और विश्वास का रिष्टा आज भी उतना ही अटूट है जितना की सदियों से चला आ रहा है, माग मेला केवल सनान नहीं, बलकि भारतिय संस्कृति, परंपरा और आस्था का जिवन्त उत्सव है, जहां हर बूंद में श्
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