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Transcript
00:00अजीब तमाश है, बाहर जाना नहीं देते मुझे, गर्मे पोटी करो तो कहते हैं समेल ला रही है, खुद तुझा से गुलाब की पतिया पहंकते हो, जिन्दगी अजाब बनाई हुए हैंनों ने मेरी नहीं, ये मुझे खाना ना देता मालिक, तो अब तक ये उपर पहुं�
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