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  • 9 hours ago

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00:00नामदेव धसाल ने कहा था जब उनसे पूछा गया कि क्या नाराजगी और विद्रोख ये कविता के आधार हो सकते हैं
00:09तो उन्होंने जवाब दिया था कि मेरे कविता में तांडव है, लाज से नहीं
00:15तब मेरी पोती ने उन विद्रोही कविताओं में नामदेव धसाल और मलिका अमरशेग की कविताओं भी उद्रत की
00:24ये करने पर उसकी टीचर ने कहा कि तुमें खाल सिर्फ अमरीकी कवियों को ही उद्रत करना था
00:31तब जो श्रिंगी ने कहा, जो मेरी पोती ने कहा, वो बहुत ही महतपून था, मेरे लिए तो खास्त और पर कर्ण महाभारत के सरवदिक प्रे और प्रभावी पात्र थे, इसलिए मृत्विंजिव का पढ़ना मेरे लिए जितना मुझे प्रभावित करने वाला था, उतना ही
01:01वो एक बड़ा मेरे लिए अनुभव था, जिसके कारण मेरे मन में मराठी साहित्ते के लिए और भी प्रशन सा उत्पन हुई, उसके बाद मैंने उनका 1997 में छपा, चावा भी पढ़ा, शत्रपति श्वाजी के बेटरे संभाजी के बारे में जो है, बट जाहिर है कि मृत्
01:31अपना निजी एहसास था, उस तक से वो कुछ कम तरी नहीं करता, फिर मेरा ये जो भावुक सने संबंद था मराठी, लेखन से वो बढ़ता ही चला गया, कभी कम नहीं हुआ, उसके बाद शायद आपको थोड़ा अच्रज हो, कि जिस लेख़प को मैंने पढ़ा, और पढ
02:01वो दलित लेखक नाम देव धसाल थे, और उनकी पत्नी मलिका अमर शेख की भी कविताएं मैंने बहुत मन से लग कर पढ़ी, एक वाक्य जो नाम देव धसाल ने कहा था, जब उनसे पूछा गया, कि क्या नाराजगी और विद्रोख,
02:31ये कविता के आधार हो सकते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया था, कि मेरे कविता में तांडव है, लास से नहीं है, उसमें राउद्र रस है, श्रिंगार रस नहीं है, और ये जो लाय तांडव की है, वही हर बेश की हर भाशा में प्रतिध्वनेत होनी चाहिए, और यही ह
03:01लेखक और उसके अलावा एक मानव कार्यकरता की तरहा नाम देख भिसाल का नाम पूरी दुनिया में जगमगा रहा था
03:122007 में दिलीब चित्रे ने अकरेंट और ब्लड नाम से उनकी कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया
03:23उसके बाद तो वो जैसे तमाम राजनीतिक कार्यकरताओं के लिए दलित विभेत को मिटाने के लिए ततपर लोगों के लिए
03:40दलित असमिता को उजागर करने वालों के लिए वो एक बाइबल जैसा बन गया
03:45सभी उसको उद्रित करते थे वो उनके लिए एक धर्म गरंथ बन गया था
03:49इससे जुड़ी भी मैं एक निजी घटना आपको सुनाना चाहती हूँ
03:54एक निजी बहुत दिल्चस्प किस्सा है
03:572012 में मेरी पोती अमरीका में स्क्रिप्स नामक उनिवर्सिटी में विश्वित दैले में साहित्य और थेटर पढ़ रही थी
04:12उसमें उनकी टीचर ने उनसे कहा कि वो स्पीकिंग पोईट्री जिससे उनका मतलब
04:20प्रोटेस्ट पोईट्री से था मंचस्त विद्रोही कविता से था उस पर लिखें
04:28तब मेरी पोती ने उन विद्रोही कविताओं में राम देव धसाल और मलिका अमर शेक की कविताओं भी उद्रित ही
04:40ये करने पर उसकी टीचर ने कहा
04:45कि तुम्हें खाल सिर्फ अमरीकी कव्यों को ही उद्रित करना था
04:49तब जो श्रही ने कहा
04:52जो मेरी पोती ने कहा
04:54वो बहुत ही महत पून था
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