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00:00मैं खेलने जाता हूँ, उसके बाद वहीं पर बैट जाता हूँ, खाने भी, वो मेरी पसंद का दाल चावल देते हैं मुझे, वहाँ पर अकसर रात में होता है, वहाँ पर कोई पाटी होगी, तो वो केक लिए आया होगे, बच्चे का उसो खड़ा करेंगे, केक ऐसे टेवल �
00:30धेले का मतलब नहीं होता, कि अंदर चल क्या रहा है, वो इधर उधर ताक रहे हैं, कुछ कर रहे हैं, ऐसे कर रहे हैं, कितनी बार हुआ है, कि वो वोहाँ उधर छोले होगे, आचारे जी नमस्ते, नृकिन जैसे ही शुरू होगा
00:53हमारी आदत हो गई है क्रिया पर प्रतिक्रिया करने की कितने आजाद हो आप जिंदगी में ये जाचना हो तो वहां पर ताली बजाये बिना और गाये बिना खड़े हो जाना और बताओ ना ताली बजाने का किसी का मन होता है ना गाने किसी का मन होता है लेकिन हर आदमी कर रह
01:23उतनी ही उसी तुमारी पहचान ऑगा यह वही तो है न ला कि भाछ को होगा वह भीतर को नि rhधारिद करेखार बहार कुछ
01:32होगा तो होगा भीतर तो हम हैं मैं हूं यह करें थोड़े कि मैं एंपलौइल हूं मैं लिए हूं यह वह सब
01:41बात होती है बहुत सारी चीजों में जहां भीड के प्रवा के साथ जाने का दबाव बन रहा हो उस दबाव को नजर अंदाज करना पड़ता है
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