00:00मीठे बच्चे मधुबन holiest of the holy बाप का घर है। यहां तुम किसी भी पतित को नहीं ला सकते। प्रश्न इस इश्वर्य मिशन में जो पक्के निश्चे बुद्धी हैं उनकी निशानिया क्या होंगी।
00:15उत्तर, एक, विस्तुती निंदा सब में धीरत से काम लेंगे। दो, क्रोध नहीं करेंगे। तीन, किसी को भी दैहिक दृष्टी से नहीं देखेंगे। आत्मा को ही देखेंगे, आत्मा होकर बात करेंगे। चार, स्त्री पुरुष साथ में रहते कमल फूल समान रहेंगे�
00:45दो, कोई भी हद की तमनाय नहीं रखनी है, आखों की बड़ी संभाल रखनी है, क्रिमिनल द्रिष्टी ना जाए, कोई भी करमेंद्रिये चलायमान ना हो, खुशी से भरपूर रहना है।
01:09वरदान, माया की खेल को साक्षी होकर देखने वाले सदा निर्भ है, माया जीत भव। समय प्रती समय जैसे आप बच्चों की स्टेज आगे बढ़ती जा रही है, ऐसे अब माया का वार नहीं होना चाहिए। माया नमसकार करने आए, वार करने नहीं। यदि माया आ भी जा
01:39आप उसे खिलोना और खेल समझ कर देखेंगे तो बहुत मजा आएगा, फिर उससे डरेंगे वा घबराएंगे नहीं। जो बच्चे सदा खिलाडी बनकर साक्षी हो माया का खेल देखते हैं, वो सदा निर्भ है वा माया जीत बन जाते हैं।
01:55स्लोगन ऐसा स्नेह का सागर बनो जो क्रोध समीप भी ना आ सके।
02:25स्थी लगाव ना हो और सर्विस भी लगाव से ना हो लेकिन निमित्त भाव से हो इससे सहज ही करमातीत बन जाएंगे।
Be the first to comment