00:00एक जमाने में एक बुढ़ा आउल एक लंबी मजबूत बलूत के दरक्त पर रहता था।
00:06हर दिन ये अकलमंद आउल अपने चारों तरफ होने वाली हर चीज को ध्यान से देखता था।
00:13वो चुप चाप बैठा रहता, दुनिया को अपनी उची जगह से शांती पूर्ण देख रहा था।
00:19जितना ज्यादा वो देखता, उतना कम बोलता, हर चीज पर गहराई से सोचता।
00:24दरक्त के नीचे वो लोगों को बातें करते, कहानिया सुनाते सुनता था।
00:30आउल ध्यान से सुनता और जो कुछ भी देखता और सुनता उससे सीखता रहता।
00:36दिन बदिन वो और ज्यादा अकलमंध होता गया और दुनिया के तरीके समझने लगा।
00:42उसने समझा के सच्ची अकल सुनने और देखने में छुपी होती है।
00:46और इस तरह बूढ़ा आउल अपने बलूत के दरक्त पर उची जगहा पर शान्त और सोच समझ कर जिन्दगी गुजार रहा था।
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