00:00धामों में एक धाम सुना नाम है खाटू धाम
00:14वहाँ विराजे शाम हमारे जै जै जै शी शाम
00:26डूबों को बारे बाबा गिर्तों को ले था
00:36हारे का सहारा है वो जै जै जै जै शी शाम
00:47जै जै जै जै शी शाम
00:56झामों को जै एक जै जै जै जै
01:07इसलत के जैयाओन को बादा i
01:09प्रत में गुरू जी को बंदना दित्ते आद गणेश
01:35प्रतियां सिमरू शारदा गिट जय सकल कलेश
01:41हाथ जोड विनती करूं सासा करूं प्रणाम
01:47शाम नाम लेकर करूं पूरण सारे काम
01:53सुन लो जान लगाकर कहता हूँ शाम कथा
02:06कौन थे दादा दादी इनके आन थे मात पिता
02:11भीम थे इनके दादा और घटोत कग्षु पिता
02:17फिटिम्बा इनकी दादी और मौरवीन की मा
02:23घटोत कग्षि के धर जनमा मौरवीने इकलाल
02:40बबर शेर के जैसे थे उस मालक के वाल
02:46इसलिए उस मालक का बरबरीक हुआ नाम
02:52बड़ी निराली कथा है इनकी बड़े निराले का
02:57मां से सीख के युद्ध तला वो बालक बन गया वीर
03:24शिव शंकर भगवान की उस में बोर तपस्या थी
03:29उए प्रसंद जो महादेव तो दिया एक वरदान
03:35बरबरीक बालक को दे दिये तीन अलो पिकवान
03:41अगनी बेव ने भी इनको पिक धनुष तिया पदान
03:55धनुष बालबा करके बढ़ गई बरबरीक की शान
04:00महाभारत के युद की है ये एक कहानी
04:06काम नाम कहता हूँ भक्तों सुनलो मेरी जुवानी
04:12करव और पांडवों बीच में युद छिना था भारी
04:29स्वयम सार दीव में युद के इरधर कृष्ण मुदारी
04:35बरबरीक के मन में भी इस युद की इच्छा जागी
04:40कण भूनी ने जाने की माता से आगिया मांगी
04:46माता बोली जाओ आशिश मेरी ले जाओ
05:00लेकिन जाने से पहले मुझे एक वचन दे जाओ
05:18युद अगर करना हो तो तिरधान रहे एक बात
05:24जण भूमी में देना होगा आरे का ही साथ
05:30नीले भोडे पर वो भो करके चले सवार
05:44जै जै खाटू वाले बाबा नीले के असवार
05:50अंतर यामी भगवन जो है लीला पुर्शोतम
05:55तिश्न कनहया रास रचया है वो ही सरगोतम
06:01जान लिया दिव बैग्रिष्टी से बरबरीक का आना
06:18तीन अलोपिक बाणों की चक्ति को भी पहचाना
06:23दीच राह में रोक लिया प्रामन का वेश बना कर
06:29बरबरीक से जान लिया सब बातों में उलजा कर
06:34सुन के बाणों पी शक्ति को मन में लिया विचार
07:02ये बाण चले तो होगा यग में हाहा कार
07:07बोले भगवन सक्चे है जो तेरे तीनों बार
07:13पेड़ के सारे पक्ते भेद के दिखलाओ प्रामान
07:19बरबरीक ने खाम लिया बल भर में दीर कमान
07:33देवी देवताओं का मन में करने लगा वो जान
07:37बरबरीक ने मन ही मन में शिव का जान लगाया
07:43इक पत्ताशी धिश्ण ने अपने पैरों तले छुपाया
07:50जान लगा कर बरबरीक ने जब महबाण चलाया
08:06पल भर में वो पेड़ के सारे पक्ते भेद के आया
08:12पैर तले एक पत्ता जो रह गया मान से बचकल
08:17मान कुष्ण के पेरों के दगा खाटने चकल
08:42बरबरीक ये बोले प्रभु अपना पैर हटाओ चोट न पहुचे आप जरा इस पत्ते से हट जाओ
08:56देखी वाण की शक्ती जब लीला पुर्षो तमने
09:01धर्म की रक्षा दीखात तीला रच डाली मन में
09:07तो रवरण में हारेंगे उनको ये बात्त ज्यात
09:21बरबरीक तो देगा देगा आरे का ही साथ
09:27तो जुविचार के बोले ब्रामन रूपी भगवान
09:33बरबरीक से दिश्ण कनहया दगे मागने दान
09:38लीला धर की लीला सिथे बरबरीक अंजान
09:55बचन दिया जो मागे आप तो दे सकता हो प्राम
10:01इतना तुन भगवान एक मुख पथैली एक मुस्कान
10:06बचन भणा कर बरबरीक से आँगा शीश का गान
10:12कृष्ण की बाणी सुनकर पल भर वो हुआ अबाब
10:38मन में शंका जागी हो ना हो कोई है बात
10:45हाथ जोड कर पूछा ए मुनिबर कौन हो आप
10:50क्यूं मांगा है शीश आपने ऐसी क्या है बात
10:56कौन हो कहां से आए मुझे को इतना बखिलाओ
11:10दर्शन देकर मुझे को अपना चंका मेरी मिटाओ
11:15दिन की सुनकर बरबरीक की दूप विराट दिखाया बरबरीक ने भगबन के चरणों में शीश जुखाया
11:27धन्य हुआ जीवन मेरा दर्शन जो आप का पाया
11:44तूप विराट दिखा कर मुझे को जीवन सफल बनाया
11:49वह बोले है भगवन मैदान अवश ही दूगा
11:55लेकिन मेरी जिछा है कि युद्ध भी मैं देखोंगा
12:01प्रिष्ण कनहया ने उनकी के बात है दैसे बानी
12:27बोले महभारत के सबसे पहले तुम हो दानी
12:33मा शक्ती को याद किया ठामी उसमें तलबार
12:39छण भर को जैचे के सारा ओन हुआ तंसार
12:44एक ही पल में धड़ से उसने अपना शीश उतारा
12:59चरणों में रख दिया तिश्ण के अदबुत बड़ा नजारा
13:04लीला धर ने शीश को अपने हाथों भी चूठाया
13:10सीच दिया अमरित से उसको अमर शीश कहलाया
13:16शीश रखा एक परवत पर और दिया एक वरदार
13:33अपने ही कई नामों में से दिया उन्हें इक नाम
13:38शाम नाम से अलियुग में होगा तेरा गुड़गार
13:44शीश कदानी कहलाओगे आटू हो गाधा
13:49कातिक माह किये काधशी को अटू नगरी भीच
14:16कुई खुदाई नकट हुआ था सुन्दर सा एक शीश
14:21आदे का सहारा है वो ओ ही लखदातार तीन बाणधारी है वो ही इले का स्वार
14:32भगती भव से जो भी कोई आए इनके बारे हो जाते हैं उन भगतों के अलमे वारे न्यारे
14:52दूर दूर से आते हैं जो लेकर भजा निशान उनके मन की इच्छा पूरा करते बाबा शान
15:03पागुन में लाला गे खाटू में हर एक सार दर्शन पाकर शाम धणी के होते सभी निहार
15:27जिस घर बाची जाएगी आवन शाम कथा उस घर से मिट जाएगी दुख सन ताप गथा
15:57कहे सुनी लिए हाथ जोड कर सुन लो जान लगाए शाम नाम सर वो तम जग में जनम सफल हो जाए
16:10कथा समापन करता हूँ मैं लेकर शाम का नाम जै जै खाटू वाले बाबा जै जै जै श्री शाम
16:21जै जै जै जै श्री शाम
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