00:00ुच की अनुपस्थती में आप ही तो राज्य का कार्भार सम्हालते हैं, वसे आप इतने चिंता में क्यों डूबे हैं?
00:07मंत्री जी, पिता जी को गय हुए एक मां से अधिक का समय हो चुका है, हमने कई सैनिकों को जंगल भेजा, पर सब खाली हाथ लोटे, पिता जी को अब तक शिकार से लोट आना चाहिए था, वो कभी, कभी इतने दिनों तक जंगल में नहीं रुखते थे
00:27मंत्री के चहरे पर भी चिंता की रेखाई उभराई
00:31राज कुमार, क्या ये संभाव नहीं है कि महराज जंगल की गहराईयों में चले गए हो?
00:42I heard that the jungle is very rich.
00:46The jungle is very low.
00:50They are very low.
00:52They are very low.
00:55What are you talking about?
00:58What do you want to say?
01:00My meaning is that the jungle is dangerous.
01:09मेरी माता पिछले दस दिनों से रो रो कर व्याकुल है
01:15अब हम हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते
01:18मंत्रे जी कल प्राते काल हम स्वयम जंगल जाएंगे
01:21और पिता जी को साथ लेकर लोटेंगे
01:24मंत्री कुछ पल के लिए गहरी सोच में डूब गया
01:28राजकुमार मैं देखिये कहना तो नहीं चाहता था
01:35पर आप तो जड़ा सुन लीजिए
01:37जाने से पहले एक साधु महराज है उनसे अवश्य मिलिए
01:42साधु और वो भी जंगल जाने से पहले क्यों मंत्री जी
01:47बात यह है कि वो साधु अत्यंत चमतकारी है राजकुमार
01:53कहते हैं उन्हें अद्भोत शक्तियों का ज्यान है
01:56वो जान सकते हैं कि आपके पिता जी जीवित भी है या फिर नहीं
02:03मंत्रे जी ये कैसी अशुब बातें कर रहे हो तुम
02:07अपनी जबान को लगाम दो
02:09मैं तो बस राजकुमार बान नहीं कह रहा था
02:15मैं बस चाहता हूँ कि आप बिना संकेत के जंगल में ना जाएं
02:21कम से कम ये तो जान लें कि महराज जीवित हैं
02:24मतलब वो जीवित ही होंगे
02:26लेकिन एक निश्चिता के तौर पर आप मतलब समझें
02:30संध्या का समय था
02:43राज्य की सीमा से लगे घने जंगल में एक साधु की जोपड़ी थी
02:47अंदर दीपक की मंद लौ टिम्टिमा रही थी
02:50राजकुमार अर्जुन और मत्री जोपड़ी के भीतर प्रवेश कर गया
02:55प्रणाम साधु महराज, साधु महराज हम है राजकुमार अर्जुन
02:59हमारे पिता महराज एक माह पहले जंगल गए थी
03:03और अब तक लोटे नहीं है
03:05कई सैनिक भेजे, कई दूतों को असफल रहे
03:08महराज, कृपया करके बताईए, क्या मेरे पिता जी सुरक्षित है
03:12हम, समझ रहा हो, तुभारी समस्या समझ रहा हो
03:17चिंता मत करो राजकुमार, मैं अपने दिवविशक्ती से पता लगाने का प्रयास करता हूँ
03:23साधू ने आँखें बंद की, कुछी पल में जोपड़ी की हवा बदल गई, और भीतर एक रह सिमय चमक फैल गई, अचानक साधू ने आँखें खोली
03:38क्या हुआ साधू महराज, आपने क्या देखा?
03:42तुम्हारे पिता जीविद है, पर एक विचित्र बात है, मुझे वो कहीं दिखाई नहीं दिये, बस एक वस्तू दिखाई दी
03:54वस्तू? कौन सी वस्तू?
03:57एक जादूई मटका, जिसे युगों पुराना कहा जा सकता है, उसमें ऐसी शक्ती है, यदि तुम उस मटके तक पहुँच गए, तो निश्चे ही जान पाओगे, तुम अपने पिता तक भी पहुँच पाओगे
04:13जादूई मटका, लेकिन सादू महराज, वो मिलेगा कहाँ?
04:21जंगल की गहराई में, पर याद रखना वो इस्तान साधारन नहीं है
04:27पर महराज, जंगल की गहराई में जाने वाले बहुत ही कम लोटे हैं, वहाँ अजीब है
04:35जो भी हो, सत्ते यही है, अगर राजकुमार अपने पिता को ढूड़ना चाहता है, तो उसे उस जादूई मटके की तलाश करनी ही होगी
04:46साधू ने आखें बंद कर ली, राजकुमार अर्जुन और मंत्री जोपड़ी से बाहर निकलाए
04:58सुभा की पहली किरन महल की मीनारों पर पड़ी, राजकुमार अर्जुन और मंत्री जोपड़ी
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