00:00पुष्पलता सिंग ने लावारिश शबों को सम्मान के साथ अन्तिम संसकार का बेटी पेश कर रही है।
00:30बीडा उठाया और निभा रही है।
01:00जब उनको लेने कोई नहीं है तो पहले अंतिम संसकार मैंने उनी का किया था।
01:04अब तक लगभग कितनी लासों को आपने इस तरह से डिस्पोज किया होगा।
01:09लगभग सौ लासों हो चुके होंगे और अभी इस मां में किवल मैं
01:14मैं 13 लास को बाडी में जला चुकी हूँ।
01:17बाकि 13 चौदर जो मुस्लिम समुदायके थे तो उनको अरजमन संस्था को सौपा गया।
01:22बाकि एक बच्चे का था।
01:2445 वर्षिय पुषपलता सिंग ने पिछले दो सालों में 100 से ज्यादा लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है।
01:36जिन शवों का कोई दाविदार नहीं होता उन्हें पुलिस पुषपलता को सौप देती है।
01:42इसमें घर्च भी आता होगा।
02:11इसमें कहीं होता है कि पंडित पुरुईत की भी आउसकता होती होगी।
02:15तो क्या इन दोनों को कैसे करती हैं आप।
02:17खर्च कार्थ है तो पहले तो लकड़ी का भी व्यवस्ता हम तुझे करना पड़ता था।
02:22तो हम लोग आपस में कंट्रिबूट कर लेते थे।
02:25प्लस गुरुप में मैं डालती हूँ तो कुछ लोग उसमें कंट्रिबूट करके मदद भी करते हैं।
02:30इसके बाद पुषपलता खुद शब का साच्रिंगार करती हैं।
02:34फिर राप्ति नदी के टत पर इस्थित शवदाह ग्रिह तक शब को ले जाती हैं।
02:39और अपने हाथों से चिता पर रखती हैं।
02:42और मुखागनी देकर पूरी हिंदू रिती रिवास से अंतिम संस्कार पूरा करती हैं।
02:47इस अनुपम सेवा के कारण अपुषपलता को लोग प्यार से अम्मा कहकर बुलाते हैं।
02:53नहीं, बस प्रस्न करते हैं लोग कि तुम्हें डर नहीं लगता, जैसे आप प्रस्न कर रहे हैं।
03:00कुछ लोग इभी कहते हैं कि हमारे हिंदु धरम में है कि महिलाओं को नहीं करना चाहिए, तुम क्यों करती हो।
03:06लेकिन मैं सच्ची जो को नहीं मानती, साइद इस्वर ही कराता है, इस्वर की ही क्रिपा है कि मैं ये कर रहे हूं।
03:11मुझे करने में कोई डर्व है नहीं लगता, वलकि मुझे संपुष्टी मिलती है, सपुन हलता है।
03:16माता-पिता परिवार में किसी की तरह का कोई रोक्तो, नहीं किसी का कोई रोक्तो, ये काम बहुत ही प्रंसस्ति और स्राहनी है।
03:24और गोरफू के लिए चीज़ हमको नहीं लगता कि कोई इस तरह से कर रहा होगा।
03:28गोरफूर से मुकेश पांडे की रिपोर्ट
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