00:00विहर की राज्थानी पट्ना से खरीब 40 किलोमेटर दूर वैशाली जिले में एक गाउ है सरस्टाई यहाँ चमगादडों की एक अदभुद दुनिया है यहाँ पेडों पर लाखों चमगादडों का बसेरा है इस गाउ में चमगादड की पूजा होती है
00:21आम तोर पर हिंदू मानेताओं की माने तो चमगादड का आसपास रहा है
00:51रहना शुब नहीं माना जाता है लेकिन सरस्टाई गाउं में चमगादड को सम्रिद्धी और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है लोग दूर दूर से आकर यहाँ पूजा करते हैं और मन्नते मांगते हैं
01:02गाउं के लिए सुर माना जाता है इसके वारने से कोई तरह को नुक्सान नहीं है
01:09मंदर के महंत शंभुनात शर्मा बताते हैं कि तलाब के पास कभी औशधिये पौधों की खेती होती थी
01:38उसी समय से यहां चमगादडों की मौजूद्गी बनी हुई है
02:08गाउं के लोग मानते हैं कि यहां चमगादडों के रहने से धन की कमी नहीं होती और वो गाउं की रक्षा करते हैं
02:18मानता है कि अन्होनी और प्राकृतिक आपदा आने वाली हो तो चमगादड अपने हाव भाव से लोगों को आगाह कर देते हैं
02:27बुदूर्कों का कहना है यह सरसाइप पोख्री एक दैत द्वारा एक रात में तयार किया गया था
02:33पांसो साल पहले उसके बाद इस पर पेर आ रहा है पेर में बादूर की संक्या बहूत पुराना आ रहा है इसके अलावा कहीं नहीं है
02:45सरसाइप गाउं में चमगादड़ों को कोई मार नहीं सकता लेकिन डेबलू एच ओ की रिपोर्ट की माने
03:03तो भारत में हर साल रैबिस से 21,000 मौते होती है जबकि बिहार में मौत का आकड़ा शुन्य है
03:09पचास फीजदी से ज़्यादा मामले चमगादड के कारण होते हैं रैबिस, निपा, इबोला ये कुछ बिमारिया है जो चमगादडों से फैलती है
03:19लेकिन ये आश्चरिय है कि सरसई में चमगादड की वज़ा से आज तक कोई बिमारी नहीं फैली
03:26ETV भारत के लिए विबेक कुमार की रिपोर्ट
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