00:00मोहबत तू निभा ना सकी फिर मैं ही क्यूं थम जाऊँ
00:21मोहबत जो तेरे बस की नहीं थी फिर मैं ही क्यूं मर मिट जाऊँ
00:38तू अगर मेरे नाम की ही ना हो सकी तू मैं काहे को ये दर्द उठाऊँ
00:48तू अगर मेरी राहों में रुक ना सकी तो मैं क्यूं नजरों में आसु बसाऊँ
00:58जावे आज से रिष्टा भी तूट गया दिल का हर वादा जैसे रूठ गया
01:10साथ जनम की बातें सारी एक पल में खामोशी ने छीन ली सब छूट गया
01:20तू ही ना समझ सकी मेरा दिल फिर मैं ही क्यों ठहरा रहूं
01:30तेरे बिन अब रातों में भी किस बात का इंतजार करूं
01:41महोबत तू निभा ना सकी फिर मैं ही क्यों ठम जाओं
01:52रंगों में भी अब रंग नहीं बाकी
02:19तेरे बिन दुनिया सुनी लगे तेरे जूटे वादों की आग में
02:30मेरे सपने राख से धुएं बन जगे
02:34तेरी नजरों से जो शुरू हुई थी दुनिया
02:40आज तेरे ही कदमों में आखर थी गिरी
02:45तु गेरों की महफिल में खोई रही
02:51मैं तुझ में ही हर सांस में जीता रहा कभी
02:56मोहबत तरे दिल दिल की नहीं तो मैं क्यूं अपने दिल से हार मानूं
03:12एक तरफा दर्द ही रहना जाए यही सोच सोच कर तूट न जाओं
03:22मोहबत तु निभा ना सकी फिर मैं ही क्यों तम जाओं
03:33जब तु मेरी रिवन ही ना सकी तो मैं क्यों मर कर भी तुझे चाओं
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