00:00एक दफा का जिक्र है, नैले आस्मान में एक निना सा बादल रहता था, जिसका नाम पफी था, पफी बाकी बादलों से छोटा था, बिलकुल रोई के गाले जैसा सफीद, हर दिन वो बड़े-बड़े बादलों को देखता, जो सोर्ज निकलते वक्त सनहरी और शाम को गिला�
00:30पफीद ही हूँ, एक दिन पफी नीचे एक बाग के उपर आ गया, बाग में रंग बरंगे फूल खिले थे, लाल गलाब ने मिस्करा कर कहा, हैलो पफी, अगर तुम्हें रंग चाहिए, तो जरा करीब आओ, पफी आहिस्ता आहिस्ता नीचे आया, और भू, गलाब की पं�
01:00पफी हंसा, फिर एक नेला प्रंदा पास से उड़ा, फड़ फड़, इसके परों से नेला रंग पफी पर लग गया, जब पफी पहाडी के उपर पहुँचा, तो वो गिलाबी, नेला और सुनहरी रंगों से चमक रहा था, वो एक नुनहे से कोशी कजह जैसा लग रहा था
01:30इस दिन के बाद पफी सिर्फ एक सफीद बादल नहीं रहा, वो आसमान का सबसे खुश, सबसे रंगीन बादल बन गया
01:39सबक, जब तुम दूसरों के साथ खुशी और महबत बांटते हो, तो तुम्हारा अपना रंग भी चमक उठता है
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