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  • 8 hours ago
वन विभाग की नई सुविधा पर वाइल्डलाइफ कंजरवेशन सोसायटी के अध्यक्ष और फोटोग्राफर उठा रहे सवाल.

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00:00जिपसी लेके जाने के सबसे बड़ी सब परिशानी ये हो गई कि जो हमको बार ग्राम से 2000 में जिपसी मिल जाती थी अब वहां से हमको 4500 रुपे दे करके उस जिपसी को लेना पड़ता है उसके वैकलपिक मार्क के तहट हम लोगो तूर्टूरिया वाला एक रास्ता था तू
00:30के से एंट्री बन कर दी गई है तूर्टूरिया बेरियर से जो भतई नाका था वहां से भी बन कर दिया गया है तो अब मजबूरी वश बलोदा बजार जीले वालों को अगर बार ग्राम में सफारी करना है तो या तो वह 4500 रुपे दे करके बसपूर से सफारी लेंगे या
01:00है कि हमको 15 किलिमीटर पहले तो कहीं 12 किलिमीटर पहले रोग दिया जाता है और कहा जाता है कि यहां से आप सफारी लीजिए तो यह सब इसी दूर्प से असुविधा जनक है बारनाव पारा में अभी हम लोगों ने परेटकों के सुविधा के लिए जो है तीन गेट जो है
01:30है जो है सफारी बहां उपलत करा जा रहे है तो एक अठीन गेट है मैनेजमेंट के जो है वहां पे अच्छा चल रहा है और रखी प्रकार इसमें ब्रबस्पूर से जो है जह सफारी का संचालन करा रहे ही
01:57we have 2,500 rupiah
02:01safari
02:03and
02:06we have to make a safari
02:12so we have to make a lot of safari
02:16but we are also preparing
02:19to define the routes
02:22so that people can get 25 rupiah
02:26foreign
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03:38foreign
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03:53So, we have to be able to get rid of the rest of our lives, and we have to be able to get rid of the rest of our lives.
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