कुरक्षेत्र में चल रहे गीता महोत्सव हरियाणा पवेलियन, पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं. बह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और कुरक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बड़े करीने से सजाया है. यहां हरियाणा की समृद्ध संस्कृति, जवीन शैली और परंपराएं देखने को मिल जाएगीजब आप पवेलियन में इंटर करते हैं तो यहां का ग्रामीण परिवेश आपका मन मोह लेगा. महिलाएं कहीं मट्ठा बना रहीं, तो कहीं पालने में बच्चे को खिला रही हैं. हुक्का गुड़गुड़ाते बुजुर्ग और चारपाई बीनता शख्स, सब कुछ जीवंत हो उठता है. डलिया बनाती महिला और चरखे पर सूत कताई. ये सब गांव की यादों को ताजा कर देते है. जांत पिसती महिला उस दौर की याद दिलाती है. जब मशीनीकरण का युग नहीं था. लोग बिना कीटनाशक वाला आटा और अनाज खाते थे. और ज्यादा हेल्दी जीवन व्यतीत करते थे. हल बैलगाड़ी के पहिए और रंग बिरंगे तोरण, यहां की समृद्धि जीवन शैली की याद दिला देते हैं. जो अब शहरों में देखने को नहीं मिलती.हरियाणा पवेलियन न केवल हरियाणा की समृद्ध संस्कृति और विरासत से लोगों को परिचित करा रहा है. बल्कि युवाओं को प्राचीन परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
00:00ये तस्वीरें कुरुछेत्र में चल रहे गीता महत्सो के हर्याना पवेलियन की हैं, जो यहां आने वाले प्रियाटकों के लिए आकर्षन का केंद्र हैं।
00:13ब्रह्म सरोवर के पुरुस्वत्म पुरा बाग में कुरुछेत्र विकास बोड और कुरुछेत्र विश्व विद्याले ने इसे बड़े करीने से सजाया है। यहां हर्याना की सम्रित संस्कृती, जीवन सैली और परंपराय देखने को मिल जाएंगी।
00:26जब आप पवेलियन में इंटर करते हैं तो यहां का ग्रामीन परिवेश आपका मन मोहलेगा। बहिलाएं कहीं मठ्था बना रही तो कहीं पालने में बच्चे को खिला रही है।
00:51जात पिस्ती महिला उस दोर की याद दिलाती है जब मसीनी करन का यूग नहीं था और लोग बीना किटनासक वाला आटा और अनाज खाते थे और ज्यादा हेल्दी जीवन व्यतित करते थे।
01:03हल बैलगाडी के पहिये और रंग बिरंगे तोरन यहां की समरिद जीवन सैली की याद दिला देते हैं जो अब सहरों में देखने को नहीं मिलती।
01:12हर्याणा पविलियन न केवल हर्याणा की समरिद संस्कृति और विरासत से लोगों को परिचित करा रहा है बलकि युगाओं को प्राचिन परंपराव से जोड़ने में भी महतपुन भूमी का निभा रहा है।
01:25एटीवी भारत के लिए कुरुछेतर से मनिस्टूरन की रिपोर्ट।
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