00:19उनके शहर का नाम था हिजर, जहां वो लोग पहाडों को काट कर अपने घर बनाते थे
00:25ये लोग बद्धर में से महल बना लेते थे
00:28ऐसे महल जिन्हें देख कर इनसान हैरान रह जाए
00:32उनके पास सब कुछ था, दौलत, जमीन, पानी और गुद्रती हुसन
00:38लेकिन अफसोस, वो अल्ला को भूल गए
00:41हमारी तकात से बड़ा कोई नहीं
00:44ये शहर हमेशा अमर रहेगा
00:48वो लोग कहते थे, हम इतने ताकतवर हैं कि हमें कोई हरा नहीं सकता
00:55हम अपने पत्थर के घरों में महफूज हैं, कौन हमें मिटा सकता है
01:00उन्होंने अल्ला के बजाए बुद्ध यानि मूर्तियां बना लिए, जिन्हें वो खुदा मानते थे
01:06हर जगा पत्थर के बुद्ध और हर दिल में घमंड
01:11फिर अल्ला ताला ने अपने नबी हजरत सालिह अलेहिस सलाम को भेजा
01:17वो समूद के लोगों में सही थे, सब उन्हें इज़त देते थे, समझते थे कि ये बहुत समझदार और नेक है
01:24हजरत सालिह अलेहिस सलाम ने उनसे कहा
01:27एए मेरी कौम के लोगों, सिर्फ अल्ला की अबादत करो, उसके सिवा कोई खुदा नहीं
01:34उन्हों ने कहा, सालिह तुम तो हमारे बीच के समझदार लोग थे, अब तुम कह रहे हो, कि हम अपने बाप दादा के खुदाओं को छोड़ दें
01:44हजरत सालिह अलेहिस सलाम ने कहा, मैं तुम्हारा भला चाहता हूँ, अल्ला ने तुम्हें सब कुछ दिया है, लेकिन अगर तुम शिर्प करते रहे, तो अजाब आएगा
01:55उन्होंने हसकर कहा, सालिह अगर तुम सच कहते हो, तो हमें कोई निशानी दिखाओ, कोई मुज़ा लाओ
02:04हजरत सालिह अलेहिस सलाम ने कहा, तुम चाहते हो मुज़ा, तो अल्ला तुम्हें एक उंटनी देगा, लेकिन याद रखना, उसे नुकसान न पहुचाना
02:14फिर उनके सामने एक अजीब मनजर हुआ, पहाड फटा और उसमें से एक उंटनी जिन्दा निकल आई, एक चमकदार रोशनी में, सब लोग देख कर खामोश हो गए, वो उंटनी ना आम थी ना इनसानी, उसका जिसम चमकता था और वो इतनी बड़ी थी, कि सब लोग उसक
02:44पानी पीने का है और एक दिन तुम्हारा, इसे तकलीफ मत देना, वरना अजाब जरूर आएगा, कुछ दिन सब कुछ ठीक रहा, उंटनी जब पानी पीने आती तो उस दिन सब लोग अपने जानवरों को नहीं लाते, अगले दिन उनका दिन होता, लेकिन धीरे धीरे उनक
03:14उनकों ने सला की, कि अगर हम इस उन्टनी को मार दें, तो सालिह का दावा जूट साबित हो जाएगा, उनका लीडर था किदार इबन सालिफ, सबसे ज्यादा शैतान इनसान, उसने अपने कुछ साथी जमा किये, और जब उन्टनी पानी पीने गई, तो उसे तीर मार कर गि
03:44अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं, तुम मजे लो, फिर अजाब जरूर आएगा, उन्होंने हस कर कहा, सालिह, अगर अजाब लाना है, तो ले आओ, तीन दिन का वक्त, फिर मुज़ा हुआ, उनके चेहरे का रंग बदल गया, पहले दिन पीला, दूसरे दिन लाल, तीसरे दि
04:14चुका था, हदरत सालिह अपने कुछ मुमिन साथियों के साथ शहर छोड़ कर चले गए, वो पहाडों के पार चले गए, तीसरे दिन रात को सब लोग सोए हुए थे के जमीन कांप उठी, फिर एक जोर का धमाका, एक करخت आवाज, सब लोग गिर गए और उनकी रूह निकल
04:44उनके पहाडों के महल, उनके मजबूत घर, सब कुछ मिटी में मिल गया, किसी ने भी बच कर दम नहीं लिया, सुबह जब धूल बैट गई, तो शहर में सिर्फ सन्नाटा था, पत्थर के घर खाली और उनके अंदर सिर्फ खाली जिस्म पड़े हुए थे, हजरत सालिह अलि
05:14कौम, मैंने तुम्हें नसीहत की थी, लेकिन तुमने नहीं मानी, यूं अल्लाह ने तकब्र और शिर्क करने वालों को मिटा दिया, आज भी हिजर के पहाडों में उनके घर मौजूद हैं, पत्थरों में काटे हुए, मगर खाली, जो देखकर हर मुसाफिर सोचता है, कि य
05:44हमें ये सबक देती है, कि दौलत, ताकत और अमारत अल्लाह का इनाम है, लेकिन घमंड तबाही है, अल्लाह की निशानियों से खेलना अजाब लाता है, सिर्फ अल्लाह की अबादत और उसके हुकम पर अमल ही नजात का रास्ता है, कहानी गेट के सफर में याद रखिए, कि
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