00:27अब जाद मिले कि मेरे लिए जो कहा जाता है मैं हुसरे योग्य बनूं और ज्यादा काम करूं और मुझ से जो अपेशाय हैं उसे मैं पुर्न करूं
00:42। भायो बैनों, अभी तीन दिन पहले ही मैं गीता की घरती कुरुक्षेत्र में था।
01:00अब आज भगवान स्री कर्ष्ण के आशिरवात और जगद गुरु स्री मधवाचारी जी के यश्की इस भूमी पर आना मेरे लिए परम संतोष का अउसर है।
01:20आज के इस अउसर पर जब एक लाख लोगों ने एक साथ भगवत गीता के श्लोग पड़े तो पूरे विश्व के लोगों ने भारत की सहस्त्र वर्षों की दिव्यता का साक्षाद दर्शन भी किया है।
01:49उडूपी आना मेरे लिए एक और वज़स से विशेश होता है।
01:56उडूपी जनसंग और भारती जनता पार्टी के शू सासन की मॉडल की कर्म भूमी रही है।
02:101968 में उडूपी के लोगों ने जनसंग के हमारे विए साचार्य जी को यहां की नगरपाली का परिशन में विज़ेई बनाया था।
02:25अरज के साथ ही उडूपी ने एक नए गवर्नेंस मॉडल की निव भी रखी थी।
02:33आज हम स्वच्छता के जिस अभियान को राष्टिय रूप देख रहे हैं उसे उडूपी ने पांच दसक पहले अपनाया था।
02:46जल आपूरती और ड्रैनेज सिस्थिम का एक नया मॉडल देना हो।
02:55उडूपी ने ही सत्तर के दसक में इन कारकमों की शुरूवाती थी।
03:03आज यह अभियान देश के राष्ट्रिय विकास का राष्ट्रिय प्रात्विक्ता का हिस्था मनकर
03:14हमारा मार्दर्शन कर रहा है।
03:18साथ्यों राम चरित मानस में लिखा है।
03:23कलिजूग केवल हरीगुन गाहा गावत नरपावही भवताहा।
03:35अर्थात कलिजूग में केवल भगवत नाम और लीला का किर्टन ही परमसाधन है।
03:47उसके गायन किर्टन से भव सागर से मुक्ति हो जाती है।
03:56हमारे समाज में मंत्रों का गीता के स्लोकों का पाड़ तो सताब्दियों से हो रहा है।
04:08पर जब एक लाख कंठ एक स्वर में इन स्लोकों का ऐसा उचारन करते हैं।
04:20जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुन्य गरंद का पाड़ करते हैं।
04:28जब ऐसे दैविय शब्द एक स्थान पर एक साथ गुंजते हैं।
04:36पर ऐसी उर्जा निकलती हैं जो हमारे मन को हमारे मस्तिस्क को एक नया स्पंदन एक नई शक्ति देती है।
04:49यही उर्जा अध्यात्म की शक्ति की है।
04:56यही उर्जा सामाजिक एक्ता की शक्ति है।
05:01इसलिए आठ लक्ष कंठ गीता का यह अवसर एक विशाल उर्जा पिंड को अनुभव करने का अवसर बन गया है।
05:16यह विश्व को सामुहिक चेतना कलेक्टिव कंश्यस्नेस की शक्ति भी दिखा रहा।
05:26साथियों, आज के दिन विशेश्नुट से मैं परम्पुज्य स्रीशी सुग्णेंद्रतिर्थ स्वामी जी को प्रणाम करता हूं।
05:41उन्होंने लक्ष कंठ गीता के इस विचार को इतने दिव्य रुप्न साकार किया है।
05:52पूरे विश्व में लोगों को अपने हाथ से गीता लेखने का विचार दे कर उन्होंने जिस कोटी गीता लेखन यग्य की शुरुवात की है।
06:05वो अभ्यान सनातन परंपरा का एक वैश्विक जन आंदोलन है।
06:13जिस तरह से हमारा युवा वग्वत जीता के भावों से इसकी सिख्षाओं से जुड़ रहा है।
06:23वो अपने आप में बहुत बड़ी प्रेरणा है।
06:30सद्यों से भारत में बेदों, उपनिशदों और सास्त्रों के ज्यान को अगली पीडी तक पहुँचाने की परंपरा रही है।
06:44और ये कारिकम भी इसी परंपरा का भगवत गीता से अगली पीडी को जोड़ने का एक सार्थक प्रयास बन गया है।
07:00साथियों, यहां आने से तीन दिन पहले मैं आयोध्या में भी था।
07:1125 नवंबर को दिवाः पंचमी के पावन दिन आयोध्या के राम जन्म भुमी मंदिर में धर्म द्वजा की सापना हुई है।
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