00:00अर्जुन एक शहर में रहने वाला लड़का था, उसे शहर का शोड़ शराबा बिलकुल पसंद नहीं था, वह हमेशा जंगल में जाने का सपना देखता था,
00:17एक दिन गर्मी की छुटियों में उसके माता पिता उसे अपने गाव ले गए जो जंगल के किनारे बसा हुआ था, गाव में अर्जुन बहुत खुश था, उसने जंगल में घूमना शुरू किया, जंगल में हर्याली चारों तरफ फैली हुई थी, पेडों पर रंग बिरंग
00:47जोपड़ी देखी और उसमें एक बूढ़ा व्यक्ति बैठा था, अर्जुन ने उनसे पूछा, दादा जी, आप यहां अकेले कैसे रहते हैं? बूढ़े व्यक्ति ने मुस्कुरा कर कहा, बेटा, जंगल मेरा घर है, मैं यहां शान्ती से रहता हूँ, उन्होंने अर्ज�
01:17उन्होंने उसे बताया कि कैसे पेड हमें ऑक्सीजन देते हैं, कैसे पशुपक्षी अपना जीवन यापन करते हैं, और कैसे जंगल का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है? अर्जुन ने ध्यान से सुना, उसने देखा कि कैसे पेडों की पत्तियां हवा में हिल रही थी, कै
01:47जिसे समझने की जरूरत है, अगले दिन अर्जुन ने जंगल की सैर के लिए एक छोटी सी डाइरी ले ली, उसने जंगल में देखी गई हर चीज को लिखा, पेडों के रंग, पक्षियों की आवाजे, कीडों की गतिविधिया, कुछ दिनों बाद अर्जुन ने महसूस कि
02:17वह पेडों की सरसराहट, पक्षियों के गीत और जरने की ध्वनी को बहुत ध्यान से सुनता था, गाव से लोटने के बाद भी अर्जुन जंगल की यादों को संजोय रखा, उसने शहर में भी पेडों की देखभाल करना शुरू किया, उसने अपने घर के पास पौधे ल�
02:47अनमोल उपहार है, उसे समझ आया कि प्रकृती की रक्षा करना हम सभी का करतव्य है, नैतिक शिक्षा, प्रकृती का संरक्षन करना हमारा दाइत्व है, हमें जंगलों की रक्षा करनी चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए, अगर आपको यह कहानी पसंद आई, तो कृप
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