00:00ये दो घरों की एक खुबसूरत सबक आमोज कहानी है, बिल्कुल अब के अंदाज में नर्म और दिल में उतर जाने वाली.
00:07दो घरों की कहानी
00:08एक बस्ती में दो घर आमने सामने वाके थे.
00:13एक घर बड़ा रोशन और हमेशा हंस्ते चेहरों से भरा रहता था.
00:17दूसरा घर छोटा सा खामोश जैसे इसकी दिवारें भी उदास हूं.
00:22पहला घर खुशियों का घर
00:24पहले घर में रहने वाला खानदान अमीर नहीं था, मगर महबबत से माला माल था.
00:29घर के अफराद कम चीजों में भी खुश रहते एक दूसरे का हाथ थाम कर मुश्किल वक्त गुजार लेते.
00:37हर शाम सहन में बैट कर कहानिया सुनाई जाती हंसी गुंचती और महनत को अबादत समझ कर हर दिन जिया जाता.
00:44दूसरा घर खामोशियों का घर
00:46दूसरे घर में दौलत थी साज उसामान भी बहुत था मगर दिलों में फासिला था.
00:53घर बढ़ा होने के बावजूद इसमें सुकून कम और बहसें ज्यादा थी.
00:56घर के अफराद एक मेज पर बैठते भी तो एक दूसरे से दूर रहते जैसे बात करने से भी बोज़ बढ़ जाए.
01:04एक दिन
01:05एक रात बहुत तेज आंधी चली.
01:08बस्ती के लोगों ने दर्वाजे बंद कर लिये, मगर सुबह जब हुआ थमी तो पत्ता चला के दोनों घरों की च्छत को नुकसान पहुँचा है.
01:16घरीब घर के अफराद ने मिलकर फॉरन मुरम्मत शुरू कर दी.
01:20महब्बत ने उनकी ठकन कम कर दी थी और हिम्मत बढ़ा दी थी.
01:25दूसरे घर के लोग जिनके पास सब कुछ था आपस में बहस करते रह गए.
01:30कौन कारीगर बुलाए?
01:32पैसे कौन देगा?
01:34मेरा काम नहीं.
01:36और उनकी मुरम्मत कई दिनों तक शुरू ही ना हो सकी.
01:49और जहां दिल दूर हूँ, वहां बेहतरीन घर भी इनसान को पना नहीं दे पाते.
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