00:00मित्रों संसार में प्रेम के अंगिनत रूप देखने को मिलते हैं
00:16कोई प्रेम माता, पिता का होता है, कोई मित्रों का, कोई दामपत्य का
00:22लेकिन इन सबसे उपर और सबसे अध्वितिय है राधा और कृष्न का प्रेम
00:28यह प्रेम साधारण नहीं, बलकी दिव्य है
00:31ऐसा प्रेम जो सांसारिक सीमाओं में बंधा नहीं, बलकी आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है
00:40आज हम समझेंगे राधा कृष्न के इस प्रेम का परमरहस्य
00:45शास्त्रों में कहा गया है बिना राधा के कृष्ण अधूरे हैं
00:50क्योंकि राधा केवल एक व्यक्ति नहीं बलकि स्वयन शक्ति स्वरूपा है
00:56कृष्ण भगवान शक्तिमान है और राधा उनकी शक्ति
01:01जैसे सूर्य और उसकी किरने अलग नहीं हो सकती
01:05वैसे ही कृष्ण और राधा भी अलग नहीं हो सकते
01:09राधा शब्द का अर्थ है वह जो आराधना की पात्र है
01:14वह भक्ती की सर्वोच्छ मूर्ती है
01:17कृष्ण शक्ती के बिना न तो लीला कर सकते है
01:22नहीं भक्तों तक अपनी कृपा पहुँचा सकते है
01:25इसी लिए राधा को कृष्ण की आत्मा का प्रतिविम कहा गया है
01:30राधा कृष्ण का प्रेम सांसारिक प्रेम जैसा नहीं
01:35संसार का प्रेम अक्सर इच्छाओं, अपेक्षाओं और मोह पर आधारित होता है
01:41लेकिन राधा कृष्ण का प्रेम निश्काम है
01:45गोपियों का प्रेन क्रिश्न से इसलिए नहीं था कि उन्हें कुछ पाना है
01:51बलकि केवल इसलिए कि बे क्रिश्न को पूरी तरह समर्पित थी
01:56राधा इस प्रेन की सर्वोच अभिव्यक्ति है
02:00श्रीमत धागवत और गोस्वामियों की रचनाओं में बताया गया है कि
02:06राधा क्रिश्न का संबंध आत्मा और परमात्मा का संबंध है
02:11राधा आत्मा है क्रिश्न परमात्मा
02:15जब आत्मा अपने सारे बंधनों से मुक्थ होकर पूर्ण समर्पन करती है
02:20तभी वह परमात्मा में विलीन हो जाती है
02:24इसी को राधा कृष्ण का दिव्य मिलन कहा गया है
02:28रास लीला को अक्सर लोग सांसारिक ग्रिष्टी से देखते हैं
02:34लेकिन यह केवल एक मृत्य नहीं बलकि दिव्य रसका प्रतीक है
02:40रास लीला दर्शाती है कि जब भक्त अपना संपून अहंकार छोड़ कर
02:46केवल कृष्ण को पाने की लालसा में डूब जाता है
02:50तो स्वय भगवान भी उस प्रेम से आकर्शित हो जाते हैं
02:55राधा रास लीला की केंद्र बिंदु है
02:58गोपियों में राधा का स्थान सर्वोच्छ है
03:02क्योंकि कृष्ण का हरिदय राधा में ही बसता है
03:07भक्ती के आचारियों ने कहा है
03:10राधा के बिना कृष्ण के नाम का जप अधूरा है
03:14इसीलिए हम कहते हैं राधे कृष्णा व्याजय श्री राधे
03:20अगर हम गहराई से देखें
03:22तो राधा कृष्ण का प्रेम हमें एक बड़ा संदेश देता है
03:26पहला प्रेम का मतलब है पूर्ण समर्पण
03:30राधा ने कृष्ण में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया बिना किसी शर्थ के
03:36दूसरा प्रेम में अहम का अंत
03:39राधा ने कभी यह नहीं कहा कि कृष्ण मेरे है
03:43बलकि उन्होंने कहा मैं कृष्ण की हूँ
03:47यही भक्ती का सर्वोच रहस्य है
03:50तीसरा प्रेम में अविभाजयता
03:54संसार में प्रेम तूट सकता है पर राधा कृष्ण का प्रेम शाश्वत है
04:00क्योंकि वह प्रेम किसी देह या रूप से नहीं बलकि आत्मा और चैतने से है
04:06आज विज्ञान कहता है कि पूर्जा और स्रोट कभी अलग नहीं हो सकते
04:12ठीक वैसे ही राधा, पूर्जा और कृष्ण, स्रोट भी कभी अलग नहीं हो सकते
04:19साधत के लिए राधा कृष्ण का प्रेम एक मार्ग दर्शक है
04:24यहां हमें सिखाता है कि पर्मात्मा को पाने का सबसे सरल्मार भक्ति है
04:30राधा जी स्वय भक्ति की स्वरूपा है
04:34इसलिए जब हम कृष्ण की उपासना करते हैं तो पहले राधा का स्मरण करते हैं
04:42जैसे राधे कृष्णा
04:44यह इसलिए है क्योंकि राधा ही वह माध्यम है
04:48जो भक्त और कृष्ण के बीच का सेतू बनती है
04:53जैसे माता ही बच्चे को पिता से मिलाती है
04:56वैसे ही राधा ही भक्त को कृष्ण से मिलाती है
05:01गौडिय वैश्नव आचार्य चैतन्य महा प्रभु ने कहा है
05:06जो राधा के चर्णों में शरण लेता है, वही वास्तव में कृष्ण तक पहुँच सकता है
05:12इसलिए भक्त राधा का नाम लेकर कृष्ण की भक्ती करते है
05:17यही भक्ती का सर्वोच रहस्य है
05:21आज के समय में जब प्रेन को केबल भौतिक आकर्शन समझा जाने लगा है
05:36आधारित होता है
05:37अगर हम राधा कृष्ण के प्रेन को अपने जीवन में उतार लें
05:42तो हमारा हर संबंध शुद्ध और निर्मल हो सकता है
05:46अगर हम राधा की तरह अपना अहमकार छोड़ दें
05:51तो हमें भी अपने जीवन में दिव्यता का अनुभव होगा
05:55और अगर हम कृष्ण की तरह हर आत्मा को प्रेन दें, तो यह संसार भी एक छोटा सा व्रिंदावन बन सकता है
06:04यही है राधा कृष्ण का शाश्वत संदेश्क, प्रेन ही भक्ती है और भक्ती ही मोक्ष का मार्ग है
06:13मित्रोंक राधा कृष्ण का प्रेम केवल एक कथा नहीं
06:18बलकि वह शाश्वत सत्य है जो हमें आत्मा और परमात्मा के मिलन की याद दिलाता है
06:24अगर इस वीडियो ने आपके जीवन में कुछ मूल्य जोड़ा हो या आपको अच्छा लगा हो
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06:34जैश्री राधे कृष्णा अगर आप ऐसे और सनातन रहसे जानना चाहते हैं
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