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  • 9 months ago
कोडरमा में मवेशी चराने की एक ऐसी अनोखी परंपरा है जहां रोज गांव का कोई एक सदस्य गांव के सारे मवेशियों को चराता है.

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00:00बदलते दोर में जहां हम तेजी से आधुनिक्ता की ओर बढ़ रहे हैं तो वहीं आज भी कोडर्मा के कई गाओं में सामुहिक मवेसी चराने की परंपरा जारी है यह परंपरा सहयोग, अनुसासन और एक्ता की मिसाल है इससे नहीं सिर्फ समय और मेहनत की बचत होती है बलकि
00:30की रच्छा के साथ साथ हमें उन पुरानी परंपराओं को भी सहजने की आवसकता है जो अनुसासन सहयोग और एक्ता को बढ़ावा दे ऐसे ही सामुहिक मवेसी चराने की परंपरा है जिसका निर्वहन आज भी कोडर्मा जिले के कई गाओं में हो रहा है आज के दोर में ज
01:00सामुहिक मवेसी चराने की परंपरा गव के लोगों को एक जुट करती है इस इस चलते आरा हुब
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01:44ुचित देख भालो इसे लेकर इस परंपरा की शुरुवात सद्यों पहले की गई थी जिसका आज भी निर्वहन किया जा रहा है।
02:14साम तक गाओं के सारे मवेशियों को चराता है और उसकी देख बाल करता है।
02:20इससे गाओं के लोग आपस बेक दूसरे से जुड़े भी रहते हैं और गाओं की एक जुरता को बल मिलता है।
02:44से मेहनत के साथ साथ समय की भी बचत होती हैं क्योंकि हर परिवार के लिए हर दिर मवेशियों चराना संभव नहीं है।
02:54सुरू से सद्यों चला रहा है।
02:56जब से हम लोग ग्यान हुआ है तब से इसी तरह से सब हम लोग गाओं मिलके एक साथ सब चलाते हैं।
03:04सद्यों पहले शुरू की गई इस परंपरा का आज के आधुनिक दोर में खासा महत्यों है।
03:30सामुहिक मवेशी चरानी की इस परंपरा से न सिर्फ मेहनत और समय की बचत होती हैं।
03:37बलकि फसलों की सुरच्छा के साथ साथ मवेश्यों को भरपूर चारा भी मिल पाता है।
03:42इसके साथ ही इस परंपरा के जरिये गाओं की एक जूटा भी बनी रहती है।
03:48ETV भारत के लिए कोडर मासे बोला संकर सिंग।
03:52दुण
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