00:00ुश्यारिवाग का हज्रत दाता मजारा साह की मजार पर हर साल उर्स का आयोजन होता है इस बार 368 उर्स का मेला लगा है उर्स मेला आपसी एक ताका परिचायक है हिंदो मुस्लिम आकर अपना सीज जुकाते हैं तीन पिछे से हिंदू परिवार फूल का दुकान मजार परि�
00:30परिच लें हमसे पहले हमारी नानी लोग बैठे थी और उसके बाद मिश्म में पापा भी बैठे हुए और यहां पर जब हम लोग आते हैं खुशी से घंदमी भी आते हैं खुशी से भी जाते हैं यहां पर कोई वेद्वाव नहीं सारा मुलकी हिंदू-मुस्लिम सीख सा�
01:00करते आए हैं जिसमें एक रामदुलारी भी है जो पिशले 30 सालों से मजार में ही फूल बेचकर जीवन यापन करती हैं इनका कहना कि उर्स मेले का साल भर इंतजार होता है ताकि फूल बेचकर घर चल सके ऐसे तो सालों भर फूल का कारोबर होता है लेकिन उर्स के दौरान �
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