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00:56ुपासना की उनकी भक्ती की अपनी इस्तूती से प्रक्षन होकर भगवान शिव ने उस तिरपासुर राच्षस का आज इकेदे नास किया
01:16भगवान के प्रती कृतक्यता वेक्त करते हुए देवताओं ने चहुं और दीब जोती प्रजुलित किरी वह अनादिकाल से चली आरी प्रमप्रा को हरकी पोड़ी भ्रमकुंड पर भी हम लोग प्रती वर्स करते हैं
01:27देखिए यह भूमी भी है यह प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से अनगिनत देवी देवता गंगा के स्पावन तट पर आज इश्नान करने दीबदान करने तब इत्यादी करने पहुंचे हैं उनकी यहाँ पर उपस्तिती में उनकी यहाँ पर भगवान की कृतक्यता �
01:57जिस प्रकार उस समय ऐसा दीब प्रजुलीत कर उसा जनक महोलता ऐसी उर्जा प्रजान करने वाला आज ये परव हम लोग मना रहे हैं
02:27प्रुबरा आज करने करने तेरी करने तेरी कि बाव़ फस्तित
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