00:00देव दीपावली की पौरानिक कथा त्रिपुरासुर नामक दैटिके वज से जुड़ी है।
00:06त्रिपुरासुर तीन लोकों स्वर्ग पृत्वी और पाताल का अधिपती बन गया था और देवताओं को सताने लगा था।
00:13उसके अत्याचारों से हर जगा हाहकार मजगया। तब सभी देवता भगवान शुड़ के पास पहुँचे और उनसे त्रिपुरासुर से मुक्ति दिलाने की प्रात्ना की।
00:22भगवान शुड़ ने देवताओं की प्रात्ना स्वीकार की और उन्होंने अपने दिव्य पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर को भस्म कर दिया।
00:30कहते हैं कि जिस दिन ये घटना घटित हुई उस दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा थी। इस विजय के कारण ही देवताओं ने स्वर्ग से उतर कर काशी नगरी में गंगा दीप जलाकर भगवान शुड़ का स्वगत किया।
00:41कहते हैं तभी से इस दिन को देव दिपावली यानी देवताओं की दिपावली के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन गंगा के घाटों पर हजारों दीप जलाए जाते हैं।
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