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  • 3 months ago
कोडरमा में रहने वाला तुरी समाज बांस से सूप और दउरा बनातें हैं. लेकिन वे सरकार के उदासिन रवैये से परेशान हैं.

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00:00ौड नमबर 7 के असनाबाद इलाके में तक्रीबन 40 तूरी परिवार निवास करते हैं जिसमें से 30 परिवार आज भी अपने पुष्टेनी बेवसाय को जिवित रखा है
00:10महिलाये जहां घर में सूप दौरा तयार करती है वहीं घर के पुरुष सदस इसे बजारों में बेचने का काम करते हैं
00:19हलांकि अब इन परिवारों को पहले जैसा मुनाफ़ा नहीं हो पा रहा है
00:23पहले जंगल से बास आसानी से मिल जाया करता था लेकिन अब इन ही बासों को महंगे दामों में खरिद कर लाना पड़ता है
00:32इसके अलावे सूप दौरा के अन्य बिकल्क भी बजारों और बड़े-बड़े मौल में उपलब्ध होते हैं
00:38जिसके कारण इस बैवसाय में थोड़ी गिरावट देखी जा रही है
00:42बास का सूप दौरा तयार करने वाली महिलाए कहती है कि वे लोग सालों से इस बैवसाय को कर रही है
00:49छट और साधी बिवाक के महिने में इनके दौरा तयार की गए उत्पादों की डिमांड बढ़ जाती है
00:55लेकिन आम दिनों में इस्थिती अच्छी नहीं रहती
00:58अगर सरकार की ओर से कुछ मदद की जाए तो इनका बैशाय सालों भर चल सकेगा
01:04और इन्हें अच्छी खासी आंदनी भी होगी
01:34अगर साथ रूफिया मिलता है तो मिलवे करता है
01:37वो दादा पूर रदे से चलते आ रहा है जो कैसे कैसे बनाते हैं पर इसको फारते शुटते हूं
01:45इसका हम लोग शाट साथ सतर पर में खरीद कर सब ले जाती है
01:51तो में बनाते हैं तो बनाते हैं चुप बनाते हैं नहीं है
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