00:00प्रियोदर्षक, आजके आपनादे शामने एक्टी कोबिता अब्रितिक औरार चेष्टा करवो, कोबिता टी नाम होच्छे आमाके भालवाशार पर, लिखेछेन बांगला शाहित्तेर एक असामन नो प्रतिभाबान एक जोन लेखोक शाहित्तिक डक्टर हुमायनाजाद, ह�
00:30आमाके भालवाशार पर, आर कीछुई आगेर मतो थाकबेना तोमार, जामन हिरोशिमार पर, आर कीछुई आगेर मतो नेई, उत्तोर थेके दोख्षिन मेरू पर्जोन्तो, जे क्वालिंग बेल बाजेनी ताकेई महुर महो शुन्बे बजरेर मतो बेजे उड़ते, एबं �
01:00भुटेर अध्भूत शब्दे, निथर स्तब्दो हे जेतो ढाका सहरेर जनोगन, आमाके भालवाशार पर, आर कीछुई आगेर मतो थाकबेना तोमार, रास्ताई नेमेई देखबे विपरीद दिक्थेके आशा, प्रतीटी रिक्षाई, छुटे आश्थी आमी, आर तोमा
01:30अबास्तब आर अबास्तब, बोस्तु आर शपनेर पार्थकको, शिरी भेबे पार आगबे शपनेर चुरोते, खांज भेबे दूपा छोडिये बोशबे अबास्तबे, लाल टक्टके फूल भेबे खोपाई गुजबे गुच्छ गुच्छ शपनो, ना खोला शावारेर �
02:00तुमुखे छिलो उद्दम परायोन आक प्राक्तन प्रेमिक, आमाके भालवाशार पर शेई नस्ट ठोट खोशे परे शेखाने फुटबे आक अनिन्द गुलाप।
02:30भींगे, तुमी जखन चौुरास्ताई एशे धर्वे आमार हाद, तखन तुमार मने हबे, ए सहर आर बिंग्षो सताब्दीर जिवन और सब्भतार नंग्रा पानिते एक्टी निलीमा छोवा म्निनारेर शिष्षे, तुमी फुटे आचोयाक निश्पाप, विशुद्धो