00:00क्यों मनाते हैं भाई दूज?
00:03क्या है भाई दूज की कथा?
00:07बहने क्यों करती हैं इस कथा का पाट?
00:11भाई दूज भारत में मनाय जाने वाला एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक्त्योहार है
00:16जो भाई बेहन के पवित्र रिष्टे को मजबूत करने का प्रतीख माना गया।
00:22ये परव दीपावली के दू दिन बार कार्तिक मास के शुकल पक्ष की द्वित्यातीथी को मनाया जाता है।
00:29साल 2025 में भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।
00:36इस दिन बेहने अपने भाईयों को आमंतरित करती हैं।
00:39उन्हें दिलक लगा कर आरती उतारती हैं और उनके अच्छे स्वास्थया, लंबी उम्र तथा सफलता की कामना भी करती हैं।
00:47ये किवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बलकि इसने आधर, विश्वास और पारिवारिक एकता का प्रदीक है।
00:55भाई दूज पर बहने अपने भाईयों के लिए खास पकवान बनाती हैं, मिठाईयां खिलाती हैं और उन्हें तिलक लगाकर आरती उतारती है।
01:04इसके बदले भाई अपनी बहनों को आशरवात देते हैं, उपहार देकर उनके जीवन में सुख सम्रिद्धी की काम ना करते हैं।
01:12इस दिन का महत्वक केवल उपहारों या तिलक तक सीमित नहीं हैं, बलकि ये पर्व जीवन भर के साथ समर्थन और भरूसी की भावना को दर्शाता है।
01:24ये तिहार भाई और बहन के बीच उस रिष्टे की याद दिलाता है, जो निस्वार्थ प्रेम, त्याग और सहयोग पर आधारित होता है।
01:54ये दिन कार्थिक शुकल त्वित्यागा था, बहन यमुना अपने भाई को देख कर बेहद प्रसन्न हुई और उन्होंने आधर पूर्वग उनका स्वागत किया।
02:24और प्रेम पूर्वग भूचन कराईगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी और उसे अगाल मृत्यों का भाई नहीं रहेगा।
02:32यम्राचनी की वर्दान स्विकार कर लिया। तभी से भाई दूच का क्योहार मनाने की परंपरा शुरू हुई।
02:40ये दिन भाई बहन के प्रेम, सुरक्षा और आपसी विश्वास को नया आयाम देने का अफसर बन गया।
02:47इस दिन का तिलग मृत् विशिश रूप से महत्वपूर्ण माना चाता है।
02:51वर्ष दुहजार पच्चीस में भाई दूच का शुब तिलग मृत् दोपहर एक बचकर उननीस मिनट से तीन बचकर पैंतीस मिनट तक रहेगा।
03:01इस समय को जोतिश राचार्य शुब और फलदायक मानते हैं। भाई दूच केवल एक पर्व नहीं बलकि एक एहसास है जो सिखाता है रिष्टों की मिठास बनाये रखने के लिए प्रेम, समय और सम्मान आवश्चक है।
03:18यतिहार उस पारिवारिक संस्क्रिती का हिस्सा है जो भारतिय समाज को जोड कर रखती है। और ये विश्वास दिलाती है कि चाहे परिस्तीथियां कैसी भी हो, भाई और बहन हामीशा एक दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।
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